अमेरिका में नौकरी करने वाले भारतीय पेशेवरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने कुछ विदेशी नागरिकों के Work Permit के स्वतः विस्तार की सुविधा खत्म कर दी है। नए नियम के तहत, जिन लोगों के वर्क परमिट की अवधि समाप्त हो जाएगी और नवीनीकरण का आवेदन लंबित होगा।

वे नया Work Permit मिलने तक काम नहीं कर सकेंगे। इसका असर खास तौर पर उन भारतीय परिवारों पर पड़ सकता है, जिनमें H-1B वीजा धारकों के जीवनसाथी काम करने के लिए EAD पर निर्भर हैं।
H-1B वीजा की जांच भी होगी सख्त
प्रस्तावित बदलावों के तहत पहले से मंजूर वीजा एक्सटेंशन (Work Permit), जिसमें H-1B वीजा से जुड़े मामले भी शामिल हैं, की जांच अधिक सख्ती से किए जाने की बात कही गई है।

इससे आवेदन की प्रक्रिया लंबी हो सकती है और कुछ मामलों में मंजूरी मिलने में देरी या आवेदन खारिज होने का जोखिम बढ़ सकता है। करीब 2 लाख वीजा एक्सटेंशन (Work Permit) आवेदनों पर कड़ी जांच का असर पड़ने का अनुमान है।
कंपनियों को करोड़ों डॉलर के नुकसान की आशंका
इन बदलावों से कर्मचारियों की उपलब्धता और कंपनियों के कामकाज पर भी असर पड़ सकता है। अनुमान के मुताबिक, अगले 18 महीनों में उत्पादकता में कमी और कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने से अमेरिकी कंपनियों को करीब 45 करोड़ डॉलर का नुकसान हो सकता है।

वहीं, पेरोल टैक्स में लगभग 1.4 करोड़ डॉलर के नुकसान की आशंका जताई गई है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य इमिग्रेशन सिस्टम में धोखाधड़ी और दुरुपयोग रोकना तथा सुरक्षा बढ़ाना है।

