Tata कम्युनिकेशंस भारत में AI सुपर हाईवे बनाने के लिए अगले 3 से 5 वर्षों में 450 मिलियन डॉलर यानी करीब ₹4,200 करोड़ तक निवेश करने की योजना बना रही है। इस प्रोजेक्ट के तहत 10,000 किलोमीटर लंबा AI-रेडी फाइबर नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जो देश के प्रमुख डेटा सेंटर और AI हब को आपस में जोड़ेगा।

Tata कंपनी का लक्ष्य डेटा सेंटर-टू-डेटा सेंटर कनेक्टिविटी बाजार में 30 से 40 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करना है। इस पहल से भारत में AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं के लिए तेज और बेहतर नेटवर्क तैयार करने में मदद मिल सकती है।
क्या है टाटा का AI सुपर हाईवे प्रोजेक्ट?
Tata कम्युनिकेशंस के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और ग्लोबल बिजनेस हेड रुपेश चोकसी के मुताबिक, कंपनी इस प्रोजेक्ट को लेकर संभावित ग्राहकों के साथ बातचीत के उन्नत चरण में है। हालांकि, अभी तक किसी कॉन्ट्रैक्ट की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

प्रस्तावित निवेश का इस्तेमाल बड़े शहरों और डेटा सेंटर के बीच लंबी दूरी के फाइबर नेटवर्क तथा मेट्रो नेटवर्क विकसित करने में किया जाएगा। कंपनी का अंतरराष्ट्रीय सबमरीन केबल नेटवर्क भी इस कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
AI और डेटा सेंटर सेक्टर को कैसे होगा फायदा?
AI टूल्स, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल से डेटा का आदान-प्रदान तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में डेटा सेंटर के बीच तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद कनेक्टिविटी की जरूरत भी बढ़ रही है। टाटा कम्युनिकेशंस का अनुमान है कि भारत में डेटा सेंटर कनेक्टिविटी का बाजार मध्यम अवधि में 1 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है।

Tata कंपनी अलग-अलग नेटवर्क कॉरिडोर में निवेश का फैसला ट्रैफिक, क्षमता की मांग और डेटा सेंटर के विस्तार के आधार पर करेगी। रुपेश चोकसी के अनुसार, ऐसे निवेश से आमतौर पर 15 से 20 प्रतिशत रिटर्न मिल सकता है। यदि यह योजना तय समय पर आगे बढ़ती है, तो भारत के AI इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिल सकती है और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास को नई गति मिल सकती है।


