Air Ticket की कीमतों में 700 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर अदालत ने सुनवाई से इनकार कर दिया। सोमवार को जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की पीठ के सामने याचिकाकर्ता के वकील ने तत्काल सुनवाई की मांग की।

उन्होंने दलील दी कि हवाई यात्रा एक जरूरी सेवा है और Air Ticket में इतनी बड़ी बढ़ोतरी संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है। इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने टिप्पणी करते हुए कहा, ‘हवाई जहाज से सफर मत कीजिए, अगला केस।’ इसके बाद अदालत ने याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया।
हवाई किराए पर नियंत्रण की मांग, पहले से चल रहा है दूसरा मामला
सुप्रीम कोर्ट पहले से ही विमानन क्षेत्र में पारदर्शिता और यात्रियों के हितों से जुड़ी एक अन्य याचिका पर सुनवाई कर रहा है। इसमें एयरलाइंस के किराए और अन्य शुल्कों में होने वाले उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए स्वतंत्र नियामक और स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने की मांग की गई है।

16 अक्टूबर को हुई सुनवाई में केंद्र सरकार ने बताया था कि विमानन क्षेत्र को नियंत्रित करने वाले 2024 के कानून के तहत नए नियमों को प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है। सरकार का कहना है कि Air Ticket बाजार की मांग और आपूर्ति के आधार पर तय होगा और सामान्य तौर पर किराए की कोई अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं की जाएगी।
1 जनवरी 2027 से लागू होंगे नए विमानन नियम
केंद्र सरकार ने ‘भारतीय वायुयान नियम, 2026’ के तहत नए दिशानिर्देश अधिसूचित किए हैं, जो 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। इनके मुताबिक, सरकार सामान्य परिस्थितियों में Air Ticket में सीधा हस्तक्षेप नहीं करेगी।

हालांकि, असाधारण स्थिति पैदा होने और जनहित में जरूरी होने पर सरकार दखल दे सकेगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पीक सीजन और आपातकाल जैसी परिस्थितियों में यात्रियों से मनमाना किराया वसूले जाने पर निगरानी रखी जाएगी।


