पंजाब के Mansa में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह उर्फ परविंदर झोटा की हत्या के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। 13 अक्टूबर 2026 को Mansa के एक मेडिकल स्टोर पर प्रतिबंधित नशीली दवाओं की बिक्री का विरोध करते समय उन पर गोलियां चलाई गईं।

बताया गया है कि झोटा उस दौरान फेसबुक लाइव कर रहे थे। इस घटना में उनकी मौत हो गई, जबकि उनके चार साथी घायल हो गए। वारदात के बाद गुस्साए लोगों ने आरोपी के मेडिकल स्टोर में तोड़फोड़ की और आग लगा दी। प्रशासन ने भी आरोपी के घर और दुकान के अवैध हिस्सों पर बुलडोजर कार्रवाई की।
इंसाफ की मांग पर पंजाब बंद, हाईवे जाम
परविंदर झोटा के परिवार ने इंसाफ मिलने तक अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया है। परिवार और Mansa एक्शन कमेटी ने विभिन्न किसान व सामाजिक संगठनों के सहयोग से 15 अक्टूबर को पंजाब बंद का आह्वान किया।

प्रदर्शनकारियों ने सिरसा-मानसा हाईवे समेत कई प्रमुख सड़कों पर जाम लगाया। उनकी मांग है कि मामले की जांच CBI से कराई जाए और पंजाब में नशे पर रोक लगाने में नाकामी को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान तथा DGP की जवाबदेही तय हो। साथ ही, स्थानीय पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की जा रही है।
राजस्थान से आरोपी गिरफ्तार, नशे के मुद्दे पर सरकार घिरी
Mansa पुलिस ने मुख्य आरोपी मेडिकल स्टोर संचालक अश्विनी कुमार को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया है। वहीं, आम आदमी पार्टी सरकार इस घटना को पुरानी आपसी रंजिश से जोड़कर देख रही है।

जबकि विपक्षी दल और प्रदर्शनकारी इसे पंजाब में नशे के नेटवर्क और कानून-व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मामला बता रहे हैं। परविंदर झोटा की हत्या ने राज्य में नशे के कारोबार पर रोक लगाने और आम लोगों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

