लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में महिला डॉक्टर के साथ कथित धोखाधड़ी, जबरन गर्भपात और धर्मांतरण के दबाव का मामला लगातार चर्चा में है। विश्वविद्यालय के पैथोलॉजी विभाग में तैनात जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर रमीज़ुद्दीन नायक पर एक महिला डॉक्टर ने गंभीर आरोप लगाए हैं।

शिकायत के मुताबिक, दोनों के बीच जुलाई में संबंध बने थे, लेकिन शादी की बात आने पर आरोपी ने धर्म परिवर्तन की शर्त रखी और निजी वीडियो वायरल करने की धमकी दी। महिला डॉक्टर ने जबरन गर्भपात कराने का आरोप भी लगाया है। इस मामले में पुलिस ने आरोपी डॉक्टर के साथ उसके माता-पिता को भी गिरफ्तार किया है। वहीं, KGMU प्रशासन ने आरोपी को निलंबित कर दिया है और उसके निष्कासन की सिफारिश भी भेजी है।
STF की जांच में सामने आया पुराना मामला, काजी की तलाश जारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को सौंप दी गई है। जांच एजेंसी KGMU के आरोपी की पहली शादी और उससे जुड़े पुराने आरोपों की भी पड़ताल कर रही है। पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहली पत्नी ने भी पहले उसके और परिवार के सदस्यों पर उत्पीड़न तथा मारपीट के आरोप लगाए थे।

STF अब पीलीभीत के एक काजी जाहिद की तलाश कर रही है, जिनकी भूमिका कथित धर्मांतरण नेटवर्क में सामने आने की बात कही जा रही है। पुलिस कई जगह छापेमारी कर रही है और मामले से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। हालांकि, आरोपी पक्ष का कहना है कि धर्मांतरण के आरोप सही नहीं हैं। फिलहाल, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
अपर्णा यादव और KGMU प्रशासन के बीच क्यों हुई तनातनी?
इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष अपर्णा यादव की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि KGMU प्रशासन मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है। इसी मुद्दे पर वह समर्थकों के साथ कुलपति कार्यालय पहुंचीं, जहां दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनके साथ आए लोगों पर तोड़फोड़ का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

अपर्णा यादव ने इन आरोपों को खारिज करते हुए प्रशासन पर अपनी नाकामियां छिपाने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी मामले में निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है। अब सबकी नजर STF की जांच पर है, जिससे इस पूरे मामले की सच्चाई और कथित नेटवर्क से जुड़े पहलुओं का खुलासा होने की उम्मीद है।


