भारत के स्वदेशी आकाश Air Defence सिस्टम को लेकर अंतरराष्ट्रीय दिलचस्पी बढ़ती जा रही है। भारत सरकार ने पुष्टि की है कि ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान ने आकाश मिसाइल सिस्टम खरीदा है। इससे मध्य एशिया के रक्षा बाजार में भारत की मौजूदगी मजबूत हुई है, जहां लंबे समय से रूस प्रमुख हथियार सप्लायर रहा है और चीन भी लगातार अपनी पकड़ बढ़ा रहा है।

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने Air Defence आकाश को भारत की प्रमुख रक्षा सफलताओं में शामिल बताते हुए संकेत दिया है कि दूसरे देशों की ओर से भी इस सिस्टम में रुचि दिखाई जा रही है। भारत के लिए यह सौदा इसलिए भी अहम है क्योंकि चीन की पश्चिमी सीमा के करीब भारतीय रक्षा उपकरणों की मौजूदगी बढ़ रही है।
Air Defence आकाश की खासियत और क्यों बढ़ रही मांग
Air Defence आकाश को कम लागत में प्रभावी एयर डिफेंस क्षमता देने वाले सिस्टम के तौर पर देखा जाता है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इसकी मिसाइल 100 मीटर से 20 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर हवाई लक्ष्यों को निशाना बना सकती है, जबकि इसकी ऑपरेशनल रेंज करीब 4.5 से 25 किलोमीटर है। सिस्टम के नए आकाश प्राइम और आकाश-NG वर्जन में बेहतर सेंसर और तकनीकी सुधार किए गए हैं।

आर्मेनिया 2022 में इसका पहला अंतरराष्ट्रीय ग्राहक बना था। जानकारों के मुताबिक रूस से हथियारों की सप्लाई में आई चुनौतियों और क्षेत्रीय देशों की रक्षा जरूरतों के बीच आकाश उनके लिए एक वैकल्पिक विकल्प बन रहा है। भारत की मजबूत घरेलू उत्पादन क्षमता और प्रशिक्षण-सपोर्ट भी संभावित खरीदारों के लिए आकर्षण बढ़ा रहे हैं।
रूस-चीन के बीच भारत के लिए खुला नया रक्षा बाजार
मध्य एशियाई देशों का भारतीय हथियारों की ओर बढ़ता रुझान ऐसे समय में सामने आया है जब रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद मॉस्को की रक्षा आपूर्ति क्षमता पर दबाव बढ़ा है और चीन इस क्षेत्र में अपनी सैन्य पहुंच मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान जैसे देशों के लिए भारत से Air Defence खरीद रूस और चीन पर निर्भरता कम करने के साथ रणनीतिक संतुलन बनाने का विकल्प भी हो सकती है।

Air Defence आकाश के अलावा भारतीय ब्रह्मोस मिसाइल की मांग भी बढ़ी है—फिलीपींस इसे खरीद चुका है और इंडोनेशिया के साथ सौदा हो चुका है। ऐसे में भारत का बढ़ता रक्षा निर्यात केवल हथियारों की बिक्री नहीं, बल्कि मध्य एशिया और हिंद-प्रशांत में उसकी रणनीतिक मौजूदगी के विस्तार का संकेत भी माना जा रहा है।

