मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। इसमें Special Intensive Revision (SIR) के दौरान कथित वैधानिक उल्लंघनों को लेकर आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए जाने के मामले की जांच के लिए SIT गठित करने की मांग भी की गई है।
CEC समेत तीन अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दाखिल याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार के अलावा वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग और निर्वाचन आयोग की आईटी महानिदेशक सीमा खन्ना के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि SIR से जुड़े कुछ फैसलों में वैधानिक कर्तव्यों का उल्लंघन हुआ। याचिका में Form-6 के मूल स्वरूप को बहाल करने और कथित तौर पर अन्य दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए फैसलों, दिशानिर्देशों तथा सॉफ्टवेयर बदलावों को रद्द करने की मांग भी की गई है।
चुनाव आयोग में मतभेद का भी जिक्र
याचिका में The Indian Express की एक जांच रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर लिखित आपत्ति दर्ज की थी। इनमें Form-6 में बदलाव, मतदाताओं के नाम जोड़ने-हटाने और वोटर डेटा के प्रबंधन जैसे मुद्दे शामिल थे। SIR के तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटने की रिपोर्ट है। अब याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।


