Elon Musk की कंपनी SpaceX ने यूक्रेन में Starlink इंटरनेट की स्पीड पर सीमा लगा दी है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के सलाहकार सेरही बेस्क्रेस्टनोव के मुताबिक, 160 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार पर चलने वाले उपकरणों का इंटरनेट धीमा हो रहा है। इससे रूसी सेना के खिलाफ यूक्रेन के ड्रोन ऑपरेशन, सैन्य संपर्क और सामान पहुंचाने के मिशन प्रभावित हुए हैं।

यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने भी कनेक्टिविटी में परेशानी की पुष्टि की है। पोलैंड के विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की ने Elon Musk से सवाल किया है कि क्या वह अपनी तकनीक के जरिए राजनीति कर रहे हैं। फिलहाल SpaceX ने इस मामले पर आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
भारत में Starlink की एंट्री, Jio और Airtel से होगा मुकाबला
यूक्रेन में Starlink को लेकर विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब Elon Musk भारत में भी अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करना चाहते हैं। Starlink जमीन पर बिछी केबल या मोबाइल टावर के बजाय अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट पहुंचाता है।

इससे गांवों, पहाड़ी क्षेत्रों और दूरदराज के इलाकों में कनेक्टिविटी बेहतर हो सकती है। भारत में इसका मुकाबला Reliance Jio और Airtel जैसी कंपनियों से होगा। मस्क सस्ते इंटरनेट प्लान की बात कह चुके हैं, लेकिन ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कीमत और नेटवर्क की गुणवत्ता अहम होगी।
लाइसेंस के बाद भी बाकी हैं जरूरी मंजूरियां
भारत में Elon Musk के Starlink को सेवा शुरू करने के लिए सुरक्षा संबंधी मंजूरियों और सैटेलाइट इंटरनेट के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी से जुड़े नियमों को पूरा करना होगा। सरकार ने Starlink के अलावा Jio Satellite Communications और Eutelsat OneWeb को भी लाइसेंस दिए हैं। साल 2024 में अंडमान-निकोबार में तस्करी की जांच और मणिपुर में सैन्य अभियान के दौरान Starlink डिवाइस मिलने की खबरें भी सामने आई थीं।

यूक्रेन का मामला इस बात पर सवाल उठाता है कि सैन्य या जरूरी सेवाओं के लिए किसी निजी कंपनी की तकनीक पर निर्भरता कितनी जोखिम भरी हो सकती है। भारत में Starlink की सफलता उसकी कीमत, नेटवर्क और सभी जरूरी मंजूरियां मिलने पर निर्भर करेगी।

