संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने की भारत की मांग का पाकिस्तान ने एक बार फिर विरोध किया है। UNSC में पाकिस्तान के राजदूत आसिम इफ्तिखार अहमद ने भारत का नाम लिए बिना कहा कि इस्लामाबाद किसी नए देश को स्थायी सदस्य बनाए जाने के पक्ष में नहीं है।

उन्होंने इसके बजाय सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने की वकालत की। इफ्तिखार अहमद के मुताबिक, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में एक अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधि और जवाबदेह सुरक्षा परिषद की जरूरत है, लेकिन नए स्थायी सदस्य जोड़ना इसका समाधान नहीं है।
‘कॉफी क्लब’ के साथ पाकिस्तान, स्थायी सीटों के विस्तार का विरोध
पाकिस्तानी राजदूत ने ‘यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस’ समूह का भी जिक्र किया, जो UNSC में नए स्थायी सदस्यों को शामिल करने का विरोध करता है। इस 12 देशों के समूह को आमतौर पर ‘कॉफी क्लब’ कहा जाता है। पाकिस्तान के साथ इसमें तुर्की, इटली, कनाडा और दक्षिण कोरिया जैसे देश शामिल हैं।

समूह का तर्क है कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सीटें बढ़ाने के बजाय निर्वाचित यानी अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के दौरान भी इस समूह ने स्थायी सदस्यों के विस्तार का विरोध किया था।
पाकिस्तान ने अस्थायी सदस्यता को बताया बेहतर विकल्प
आसिम इफ्तिखार अहमद ने कहा कि पाकिस्तान और कई अन्य देश अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने में योगदान देने के लिए सक्षम हैं। उनके मुताबिक, देशों को स्थायी सदस्यता और वीटो जैसे विशेषाधिकार के बिना भी सुरक्षा परिषद की जिम्मेदारियों में बड़ी भूमिका निभाने का मौका मिलना चाहिए।

UNSC में सुधार को लेकर भारत लंबे समय से स्थायी सदस्यता की दावेदारी करता रहा है। ऐसे में पाकिस्तान का ताजा रुख सुरक्षा परिषद के विस्तार को लेकर चल रही अंतरराष्ट्रीय बहस में दोनों देशों के अलग-अलग दृष्टिकोण को सामने रखता है।


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