शिवसेना (यूबीटी) की नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद Priyanka Chaturvedi ने यौन उत्पीड़न के आरोपों में घिरे कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम को लेकर मीडिया पर सवाल उठाए हैं। जेएनयू से बर्खास्त प्रोफेसर और इनर मणिपुर के सांसद अकोइजम का एक न्यूज चैनल पर इंटरव्यू प्रसारित होने के बाद प्रियंका ने नाराजगी जताई।

Priyanka Chaturvedi कहा कि चैनल ने आरोपी सांसद को अपना पक्ष रखने के लिए लंबा समय दिया, लेकिन क्या उन महिलाओं की बात सामने लाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए थी, जिन्होंने उनके खिलाफ शिकायतें की हैं? Priyanka Chaturvedi ने सवाल किया कि जेएनयू की संबंधित कमेटी के सदस्यों को भी प्राइम टाइम में जगह देकर पीड़ित महिलाओं का पक्ष क्यों नहीं दिखाया गया। उन्होंने मीडिया पर दोहरे रवैये का आरोप लगाते हुए कहा कि महिलाओं को न्याय देने की बात करने वाला मीडिया आरोपियों को अपनी बेगुनाही पेश करने का मंच भी दे देता है।
कांग्रेस में अपने साथ हुई घटना को फिर किया याद
Priyanka Chaturvedi ने हाल ही में लखनऊ में कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी में पार्टी की महिला सदस्यों के साथ कथित अभद्रता का वीडियो साझा करते हुए सितंबर 2018 की घटना याद दिलाई थी। उस समय प्रियंका कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता थीं। उन्होंने आरोप लगाया था कि मथुरा में पार्टी के कुछ पुरुष कार्यकर्ताओं ने उनके साथ बदसलूकी की थी।

कार्रवाई के बाद उन कार्यकर्ताओं की दोबारा बहाली से नाराज होकर उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़ दी और शिवसेना का दामन थाम लिया। उस दौरान राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष थे। अब अकोइजम के मामले में प्रियंका की टिप्पणी ने एक बार फिर कांग्रेस में महिला सम्मान और पार्टी के भीतर महिलाओं के साथ व्यवहार को लेकर बहस तेज कर दी है।
राहुल गांधी पर निशाना या महिला सम्मान का मुद्दा?
Priyanka Chaturvedi ने अपने ताजा बयान में सीधे राहुल गांधी का नाम नहीं लिया है, लेकिन उनके पुराने अनुभवों और कांग्रेस से जुड़े हालिया विवादों के कारण राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं। दूसरी ओर, बीजेपी भी कांग्रेस सांसद के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है। पार्टी की 15 महिला सांसदों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौंपकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।

ऐसे में प्रियंका चतुर्वेदी की टिप्पणी ने विवाद को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। हालांकि, यौन उत्पीड़न से जुड़े आरोपों और संबंधित पक्षों के जवाब को अलग-अलग समझना जरूरी है। फिलहाल, इस पूरे मामले में महिला सम्मान, मीडिया की जिम्मेदारी और राजनीतिक दलों के रुख पर बहस जारी है।


