उत्तर प्रदेश के Pilibhit में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी के मामले में भारत निर्वाचन आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है। आयोग के निर्देश पर तत्कालीन एसडीएम मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को निलंबित कर दिया गया है।

इतना ही नहीं, Pilibhit में दोनों अधिकारियों और वीआरसी कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 198 जोड़ने का भी आदेश दिया गया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने दोनों एसडीएम के निलंबन की पुष्टि की है।
13,779 निरस्त फॉर्म की जांच में खुली गड़बड़ी
यह पूरा मामला Pilibhit सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि 13,779 निरस्त ऑफलाइन फॉर्मों के निस्तारण में तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

इस मामले में राजनीतिक दलों की ओर से भी शिकायतें की गई थीं। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने कार्रवाई का निर्देश दिया। बीएनएस की धारा 198 लोक सेवक द्वारा कानून के निर्देशों की जानबूझकर अवहेलना से संबंधित है।
आयोग की अनुमति के बिना नहीं होगी बहाली
इससे पहले Pilibhit शासन ने दोनों अधिकारियों को प्रतीक्षारत कर दिया था और जिलाधिकारी ने उन्हें जिले से कार्यमुक्त कर दिया था। अब निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि दोनों अधिकारियों को उसकी पूर्व अनुमति के बिना बहाल नहीं किया जा सकेगा।

इस कार्रवाई के बाद मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में अधिकारियों की जवाबदेही का मुद्दा फिर चर्चा में है। अब इस मामले में आगे होने वाली प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी।


