शहरों की भागदौड़, गर्मी और प्रदूषण से राहत पाने के लिए लोग पहाड़ों का रुख करते हैं, लेकिन बढ़ता अनियंत्रित पर्यटन (Overtourism) अब इन्हीं पहाड़ों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। जहां कभी शांति, साफ हवा और प्राकृतिक खूबसूरती पर्यटकों को खींचती थी, वहां अब ट्रैफिक जाम, भीड़ और कचरे का दबाव दिखाई देने लगा है। क्षमता से ज्यादा पर्यटकों (Overtourism) की आवाजाही, जंगलों की कटाई और होटल-होमस्टे के लिए हो रहा अंधाधुंध निर्माण पहाड़ी इलाकों के प्राकृतिक संतुलन पर असर डाल रहा है।

जाम, कचरा और निर्माण ने बढ़ाई परेशानी
संकरी पहाड़ी सड़कों पर ज्यादा पर्यटकों (Overtourism) से बढ़ती गाड़ियों का दबाव घंटों लंबे जाम की वजह बन रहा है, वहीं प्लास्टिक और दूसरे नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरे से नदियां और वादियां प्रभावित हो रही हैं। दूसरी ओर, निर्माण के लिए पहाड़ काटने और जंगलों पर बढ़ते दबाव से भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ता है।

पर्यटकों (Overtourism) का असर सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं है। पहाड़ों के पारंपरिक जल स्रोत जैसे धारे और नौले भी सूखने या प्रदूषित होने की समस्या से जूझ रहे हैं, जबकि तेजी से बढ़ता व्यावसायीकरण स्थानीय जीवन और संस्कृति को भी बदल रहा है।
समाधान है जिम्मेदार पर्यटन
पहाड़ों को बचाने के लिए पर्यटन को रोकना नहीं, बल्कि उसे जिम्मेदार और नियंत्रित बनाना जरूरी है। पर्यटकों की संख्या को स्थानीय क्षमता के अनुसार रखने, निर्माण पर सख्त नियम लागू करने, कचरा प्रबंधन मजबूत करने और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने जैसे कदम जरूरी हैं।

पर्यटकों को भी प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने, कचरा वापस ले जाने और स्थानीय पर्यावरण व संस्कृति का सम्मान करने की जिम्मेदारी समझनी होगी। पहाड़ सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के लिए पानी, जंगल और जैव-विविधता का आधार हैं—इसलिए इनका सुकून बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।


