प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अवैध तरीके से लोगों को अमेरिका भेजने वाले कथित Dunki Route नेटवर्क से जुड़े तरुण खोसला को गिरफ्तार किया है। फरवरी 2025 में अमेरिका से निर्वासित किए गए भारतीय नागरिकों के मामले में यह कार्रवाई की गई। ईडी के मुताबिक, खोसला को 23 अक्टूबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया गया था।

विशेष पीएमएलए अदालत ने उसे 30 अक्टूबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि खोसला पंजाब और हरियाणा के एजेंटों के संपर्क में था, जो विदेश जाने के इच्छुक लोगों से पासपोर्ट और पैसे इकट्ठा कर उसे सौंपते थे। इसके बाद वह दक्षिण अमेरिकी देशों के वीजा और हवाई टिकटों की व्यवस्था करता था (Dunki Route), ताकि लोगों को अलग-अलग रास्तों से अमेरिकी सीमा तक पहुंचाया जा सके।
30 से 60 लाख रुपये तक वसूली, मोबाइल चैट से मिले सुराग
ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि एजेंट लोगों को कानूनी तरीके से अमेरिका भेजने का भरोसा देते थे, लेकिन कथित तौर पर उन्हें खतरनाक और गैरकानूनी Dunki Route से भेजा जाता था। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति से करीब 30 लाख से 60 लाख रुपये तक वसूले जाने की बात सामने आई है।

जांच एजेंसी के अनुसार, खोसला के जब्त मोबाइल फोन से मिली चैट में आव्रजन मंजूरी, एयरलाइन टिकट और ट्रांजिट व्यवस्था से जुड़े संकेत मिले हैं। ईडी ने 9 और 11 जुलाई 2025 को 19 ठिकानों पर छापेमारी कर दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी जब्त किए थे। यह जांच फरवरी 2025 में 300 से अधिक भारतीय नागरिकों को अमेरिका से निर्वासित किए जाने के बाद शुरू हुई थी।
इन रास्तों से अमेरिका पहुंचाए जाते थे लोग
जांच में Dunki Route के तीन प्रमुख रास्तों का पता चला है। पहले रास्ते में लोग हवाई जहाज से अल सल्वाडोर पहुंचते और फिर मेक्सिको के तिजुआना के रास्ते अमेरिकी सीमा तक जाते थे। दूसरे रास्ते में दुबई या अदीस अबाबा के जरिए गुयाना पहुंचकर ब्राजील, इक्वाडोर, कोलंबिया और मध्य अमेरिकी देशों से होते हुए मेक्सिको तक पहुंचने की व्यवस्था बताई गई है।

तीसरे रास्ते में गुयाना से ब्राजील, बोलीविया, पेरू, कोलंबिया, पनामा, कोस्टा रिका, निकारागुआ, होंडुरास, अल सल्वाडोर और ग्वाटेमाला होते हुए मेक्सिको के रास्ते अमेरिका पहुंचना शामिल था। ईडी अब इस नेटवर्क में शामिल अन्य एजेंटों, पैसों के लेन-देन और अवैध विदेश यात्रा की पूरी व्यवस्था की जांच कर रही है।


