सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा और विधानसभा की SC-ST Reservation सीटों को हर चुनाव में बदलने यानी रोटेशन लागू करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। बुधवार को CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि SC-ST Reservation सीटों का रोटेशन तय करना विधायिका का नीतिगत विषय है, इसमें अदालत दखल नहीं दे सकती।

सुनवाई के दौरान CJI ने याचिकाकर्ता के वकील से हल्के अंदाज में कहा, ‘आप गलत नंबर डायल कर रहे हैं। यह विरोध और प्रदर्शन का दौर है, शायद आपको भी ऐसा करना चाहिए।’ कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 332 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि SC-ST Reservation के लिए सीटों का आरक्षण संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा है।
70 साल से आरक्षित सीट पर उठाया सवाल
यह याचिका उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की कादीपुर विधानसभा सीट से जुड़े मतदाता जगदीश सिंह ने दाखिल की थी। उनका कहना था कि यह सीट 1952 के पहले विधानसभा चुनाव से लगातार SC समुदाय के लिए आरक्षित है और इसका फायदा कुछ ही परिवारों तक सीमित रह गया है।

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि पंचायत और नगर निकाय चुनावों की तरह विधानसभा सीटों पर भी SC-ST Reservation का रोटेशन होना चाहिए, ताकि मतदाताओं को उम्मीदवार चुनने के अधिक विकल्प मिल सकें। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 19 से जोड़ते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था में मतदाता केवल SC समुदाय के उम्मीदवारों में से ही चुनाव कर सकता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने SC-ST Reservation दलीलों को हस्तक्षेप का आधार नहीं माना।
सुप्रीम कोर्ट ने बताई रोटेशन पर दखल न देने की वजह
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि यह मानना सही नहीं है कि मतदाता केवल जाति के आधार पर ही वोट करते हैं। लोकतंत्र में किसे चुनना है, इसका फैसला मतदाताओं को करना है, अदालत को नहीं।

कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव लड़ने का अधिकार किसी व्यक्ति को सिर्फ एक सीट तक सीमित नहीं करता और वह सामान्य सीट से भी चुनाव लड़ सकता है। साथ ही, किसी सीट को आरक्षित करने के लिए तय मानदंडों से असहमति मात्र के आधार पर पूरी प्रक्रिया को असंवैधानिक नहीं कहा जा सकता। इन टिप्पणियों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

