दिल्ली में जारी DTC बस हड़ताल को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को दिल्ली सरकार से सवाल किया कि सेवा प्रभावित होने के बावजूद ESMA (Essential Services Maintenance Act) लागू करने पर अब तक फैसला क्यों नहीं हुआ। कोर्ट ने सरकार को मौजूदा स्थिति की समीक्षा कर कानून के मुताबिक उचित निर्णय लेने और बस सेवा सुचारू करने पर जोर दिया।
96% बसें लौटने का दावा
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ अमी सिसोदिया की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। DTC की ओर से पेश वकील अवनीश अहलावत ने बताया कि ESMA लागू करने की सिफारिश वाली फाइल दिल्ली सरकार को भेजी जा चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि करीब 96 फीसदी बसें दोबारा सेवा में लौट आई हैं। DTC की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ लोग WhatsApp के जरिए हड़ताल जारी रखने के लिए संदेश भेज रहे हैं और कुछ बसों में तोड़फोड़ की घटनाएं हुई हैं।
यात्रियों की परेशानी पर कोर्ट की चिंता
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि हड़ताल के कारण बड़ी संख्या में यात्री प्रभावित हुए हैं। इनमें नौकरीपेशा लोगों के साथ छात्र, बुजुर्ग, मरीज, दिव्यांग और अन्य सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर यात्री शामिल हैं। बस सेवा प्रभावित होने से कई लोगों को दूसरे साधनों का सहारा लेना पड़ा। हड़ताल के कारण दिल्ली के कई इलाकों में यात्रियों को लंबे इंतजार और वैकल्पिक परिवहन की समस्या का सामना करना पड़ा है। इससे पहले भी रिपोर्टों में बड़ी संख्या में बसों के सड़कों से बाहर रहने की बात सामने आई थी।
यात्रियों के लिए मेट्रो ने बढ़ाए फेरे
DTC बसों की कमी के बीच दिल्ली मेट्रो पर भी यात्रियों का दबाव बढ़ा है। बढ़ती भीड़ को देखते हुए DMRC ने अतिरिक्त ट्रेन सेवाएं संचालित की हैं। 18 सितंबर को मेट्रो में रिकॉर्ड स्तर की दैनिक बोर्डिंग दर्ज की गई थी। हाईकोर्ट ने मामले का निपटारा करते हुए सरकार को कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई पर विचार करने को कहा है। साथ ही, स्थिति में सुधार नहीं होने पर याचिकाकर्ता को दोबारा अदालत का रुख करने की छूट दी गई है।


