30 सितंबर को उड़ान के दौरान कॉकपिट में हुए जानलेवा हमले के बावजूद कैप्टन स्मित मच्छार (Captain Smit Machchhar) ने जिस अदम्य साहस का परिचय दिया, वह अब पूरी दुनिया में चर्चा का विषय है। गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और विमान में सवार 170 से अधिक यात्रियों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई। हमले में Captain Smit Machchhar के शरीर पर चाकू के कई घाव आए थे और वह घायल अवस्था में कॉकपिट के फर्श पर पड़े थे।

विमान लगातार नीचे की ओर जा रहा था और स्थिति बेहद खतरनाक थी। ऐसे समय में जब कुछ सेकंड की देरी भी कई जिंदगियों पर भारी पड़ सकती थी, Captain Smit Machchhar ने अपना मानसिक संतुलन बनाए रखा। उन्होंने बताया कि उस मुश्किल घड़ी में वे लगातार हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे। उनके मुताबिक, इससे उन्हें भीतर से हिम्मत, साहस और आत्मबल मिला और उन्होंने संकट के बीच अपनी जिम्मेदारी निभाने का प्रयास जारी रखा।
PM मोदी से बातचीत में फिर सामने आया हनुमान चालीसा का जिक्र
Captain Smit Machchhar के साहस की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सराहना की। प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉल पर करीब 10 मिनट तक उनसे बातचीत कर उनका हालचाल जाना और उनकी बहादुरी की प्रशंसा की। बातचीत के दौरान हनुमान चालीसा और भारतीय संस्कारों का भी जिक्र हुआ। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीयों और सनातन संस्कृति के संस्कार इंसान को जान लेना नहीं, बल्कि जान बचाना सिखाते हैं, और Captain Smit ने अपने साहस से इसे दुनिया के सामने साबित किया है।

Captain Smit ने भी अपने आत्मबल और हिम्मत के लिए हनुमान चालीसा को श्रेय दिया। यह प्रसंग इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि एक ओर विमान में संकट के दौरान अलग-अलग धर्मों और पृष्ठभूमि से जुड़े लोग मौजूद थे, वहीं दूसरी ओर एक मुस्लिम धर्म के पायलट, यहूदी धर्म के यात्री और हिंदू धर्म से जुड़े Captain Smit की मौजूदगी भारत की उस सोच को सामने रखती है, जो धर्म और जाति से ऊपर इंसानियत और जिम्मेदारी को देखती है।
बहादुरी से बड़ा संदेश—‘वसुधैव कुटुम्बकम्’
Captain Smit की घटना पर देश-दुनिया में चर्चा के बीच राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। जहां उनकी बहादुरी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली, वहीं भारत में विपक्ष की ओर से इस घटना पर अपेक्षाकृत कम सार्वजनिक प्रतिक्रिया दिखाई देने की बात कही जा रही है। इस पूरे प्रसंग को केवल राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय इसका बड़ा संदेश भी सामने आता है—संकट के समय धर्म, जाति और पहचान से ऊपर इंसानियत और कर्तव्य खड़ा होता है।

भारत की संस्कृति में ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ यानी पूरी दुनिया को एक परिवार मानने की भावना इसी सोच को दर्शाती है। कैप्टन स्मित ने जिस परिस्थिति में अपनी जिम्मेदारी निभाई, वह सिर्फ एक पायलट की बहादुरी की कहानी नहीं, बल्कि साहस, आत्मबल, जिम्मेदारी और मानवता की कहानी है। भारत और उसकी संस्कृति को लेकर अलग-अलग धारणाएं रखने वालों के लिए भी यह घटना एक ऐसा उदाहरण है, जहां अलग-अलग आस्थाओं से जुड़े लोग एक-दूसरे की जिंदगी बचाने के लिए साथ खड़े दिखाई दिए।


