अक्टूबर 2026 में Brazil और सर्बिया की राजनीति में बड़े बदलाव की चर्चा है। Brazil में लूला दा सिल्वा और दक्षिणपंथी नेता फ्लावियो बोल्सोनारो के बीच कड़ा मुकाबला बताया जा रहा है, जबकि सर्बिया में छात्र आंदोलन से जुड़ी ‘स्टूडेंट लिस्ट’ ने लंबे समय से सत्ता में प्रभाव रखने वाले अलेक्जेंडर वुसिक की पार्टी को चुनौती दी है।

इन घटनाओं के जरिए आर्थिक राहत, भ्रष्टाचार पर कार्रवाई और लोकतांत्रिक व्यवस्था जैसे मुद्दे फिर चर्चा में आ गए हैं। हालांकि, दोनों देशों के चुनाव परिणामों और सीटों के आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
ब्राजील में लूला और फ्लावियो बोल्सोनारो के बीच मुकाबला
Brazil के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर दिए गए आंकड़ों के अनुसार, लूला दा सिल्वा को 51.75% और फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.25% वोट मिलने का दावा किया गया है। लूला ने गरीब परिवारों के लिए आर्थिक सहायता बढ़ाने और दक्षिणपंथी नीतियों का विरोध करने पर जोर दिया।

वहीं, फ्लावियो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं। यदि ये आंकड़े सही साबित होते हैं, तो यह चुनाव Brazil की राजनीति में वामपंथी और दक्षिणपंथी विचारधाराओं के बीच करीबी मुकाबले को दिखाएगा।
सर्बिया में छात्र आंदोलन ने दी वुसिक को चुनौती
सर्बिया में ‘स्टूडेंट लिस्ट’ को शुरुआती अनुमानों में 250 सदस्यीय संसद की 135 से 140 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है, जबकि अलेक्जेंडर वुसिक के गठबंधन को करीब 105 सीटें मिलने का दावा है। नवंबर 2024 में नोवी साद रेलवे स्टेशन पर हुए हादसे के बाद भ्रष्टाचार और जवाबदेही को लेकर छात्र आंदोलन तेज हुआ था।

इसी आंदोलन ने चुनावी राजनीति में अपनी जगह बनाई। दोनों देशों के घटनाक्रम यह दिखाते हैं कि आर्थिक नीतियां, सरकारी जवाबदेही और जनता की मांगें चुनावी बहस में अहम भूमिका निभाती हैं। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले आधिकारिक चुनाव परिणामों की पुष्टि जरूरी है।

