Israel के आम चुनावों में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और विपक्षी नेता गादी आइसेनकोट, दोनों ही बहुमत का आंकड़ा छूने में नाकाम नजर आ रहे हैं। 120 सीटों वाली Israel संसद (नेसेट) में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की जरूरत है, जबकि शुरुआती अनुमानों के मुताबिक नेतन्याहू का दक्षिणपंथी गठबंधन करीब 53 और विपक्षी गुट 48 सीटों पर आगे है।

वहीं, अरब पार्टियों के खाते में 18-19 सीटें आने का अनुमान है। ऐसे में सरकार गठन की चाबी छोटे दलों और संभावित गठबंधन के हाथ में जा सकती है। बैलेट वोटों की गिनती पूरी हो चुकी है, जबकि आधिकारिक नतीजे 4 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।
नेतन्याहू के पास क्या हैं सरकार बनाने के विकल्प?
बहुमत से पीछे रहने के बाद नेतन्याहू के सामने छोटे दलों को साथ लाने या विपक्ष के कुछ सांसदों का समर्थन हासिल करने की चुनौती है। दूसरी ओर, गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाला विपक्ष अरब पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाने की कोशिश कर सकता है, लेकिन वैचारिक मतभेद इस गठबंधन की राह मुश्किल बना सकते हैं।

इसके अलावा, दोनों बड़े राजनीतिक गुटों के बीच राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने का विकल्प भी चर्चा में है। इस व्यवस्था में दोनों नेता बारी-बारी से प्रधानमंत्री पद संभाल सकते हैं। चुनाव के अंतिम नतीजों के बाद राष्ट्रपति इसाक हर्जोग राजनीतिक दलों से बातचीत करेंगे और बहुमत जुटाने की संभावना वाले नेता को सरकार बनाने के लिए 28 दिन का समय देंगे। जरूरत पड़ने पर इसे 14 दिन और बढ़ाया जा सकता है।
राजनीतिक संकट के बीच इजरायल के सामने बड़ी चुनौतियां
Israel में सरकार गठन का संकट ऐसे समय आया है, जब देश गाजा युद्ध, ईरान के साथ तनाव, बंधकों की रिहाई और अनिवार्य सैन्य सेवा से धार्मिक समुदायों को छूट जैसे गंभीर मुद्दों से जूझ रहा है। नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार के आरोप और उनकी युद्ध नीति को लेकर भी राजनीतिक विवाद बना हुआ है। यदि कोई भी नेता तय समय में बहुमत साबित नहीं कर पाता, तो संसद भंग होने और नए चुनाव कराने की नौबत आ सकती है।

तब तक नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे। अब सबकी नजर 4 नवंबर के आधिकारिक नतीजों और उसके बाद होने वाली राजनीतिक बातचीत पर है, जो तय करेगी कि Israel को नई सरकार मिलेगी या देश एक बार फिर चुनावी संकट में फंसेगा।

