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Supreme Court: पेपर ना होना पशु वध का प्रमाण नहीं

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Supreme Court ने मवेशियों के परिवहन से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि सिर्फ परिवहन दस्तावेज नहीं होने से यह नहीं माना जा सकता कि मवेशियों को वध के लिए ले जाया जा रहा था। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने छत्तीसगढ़ कृषि पशु संरक्षण अधिनियम के तहत दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति की सजा रद्द कर उसे बरी कर दिया। Supreme Court ने साफ किया कि धारा 6 के तहत दोष साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष को यह प्रमाणित करना होगा कि मवेशियों को वध के लिए ले जाया जा रहा था या आरोपी को इस बात की जानकारी थी कि उनके वध की संभावना है।

32 बैलों से भरे ट्रक को रोका गया था

मामले में पुलिस ने सूचना के आधार पर केदुवा से ओडिशा जा रहे 32 बैलों से भरे ट्रक को रोका था। ट्रक के ड्राइवर और क्लीनर के साथ आगे चल रही बोलेरो में सवार चार लोगों को भी कथित एस्कॉर्ट वाहन के आधार पर गिरफ्तार किया गया। निचली अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए एक साल के कठोर कारावास और 1,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। बाद की अदालतों ने भी दोषसिद्धि बरकरार रखी, हालांकि हाईकोर्ट ने सजा को पहले से जेल में बिताई अवधि तक सीमित कर दिया।

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Supreme Court ने कहा- पहले अपराध साबित करना जरूरी

अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल किसी गवाह का अनुमान या दस्तावेजों की कमी, बिना अन्य ठोस सबूत के, अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। Supreme Court ने स्पष्ट किया कि कानून में आरोपी पर आने वाला ‘विपरीत बोझ’ तभी लागू होगा, जब अभियोजन पक्ष पहले अपराध के जरूरी तत्व साबित कर दे। चूंकि इस मामले में यह साबित नहीं हो सका कि अपीलकर्ता को मवेशियों के वध के लिए ले जाए जाने की जानकारी थी, इसलिए अदालत ने उसकी दोषसिद्धि रद्द कर दी और अपील स्वीकार कर ली।

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