मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर सियासी बहस तेज हो गई है। इस बीच भारत के पूर्व विदेश सचिव Kanwal Sibal ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के विपक्षी प्रतिनिधिमंडल से मिलने और उसका ज्ञापन स्वीकार करने के कदम का समर्थन किया है।

Kanwal Sibal ने कहा कि राष्ट्रपति ने ज्ञापन स्वीकार करके सही किया, लेकिन जब उन्होंने विपक्ष से आरोपों के समर्थन में सबूत मांगे, तो उनके दावों पर सवाल भी उठे। सिब्बल के मुताबिक, यह कहना कि ‘पूरा देश वोट चोरी के बारे में जानता है’, अपने आप में कोई ठोस जवाब नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति की भूमिका को सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया के रूप में देखा।
विपक्ष ने की चुनाव रद्द करने और बैलट पेपर की मांग
शुक्रवार को राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और ममता बनर्जी समेत 10 सदस्यीय विपक्षी प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। विपक्ष ने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर वोट चोरी हो रही है।

प्रतिनिधिमंडल ने पिछले दो वर्षों में हुए चुनाव रद्द करने और ईवीएम की जगह बैलट पेपर से मतदान कराने की मांग भी रखी। विपक्षी नेताओं ने मुलाकात के बाद दावा किया कि राष्ट्रपति ने उनकी बात सुनी और जांच को लेकर भरोसा दिया। हालांकि, Kanwal Sibal ने यह भी स्वीकार किया कि राष्ट्रपति ने आरोपों के समर्थन में सबूत मांगे थे।
राहुल गांधी ने मुलाकात को बताया ‘अविश्वसनीय’
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने इसे ‘अविश्वसनीय’ बताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि राष्ट्रपति उनकी बातों को इस तरह सुनेंगी। वहीं, Kanwal Sibal ने उनकी इस प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि राष्ट्रपति का विपक्षी प्रतिनिधिमंडल से मिलना और ज्ञापन स्वीकार करना कोई असामान्य बात नहीं है।

फिलहाल, वोट चोरी के आरोपों और चुनाव प्रक्रिया में बदलाव की विपक्ष की मांग को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। इन आरोपों की पुष्टि और उनके आधार का सवाल इस विवाद के केंद्र में बना हुआ है।


