केंद्र सरकार ने अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए Agniveer के लिए बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के मुताबिक, चार साल की सेवा पूरी करने वाले 75 प्रतिशत Agniveer को अब दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल दिया जाएगा। इससे वे कुल छह साल तक सेना में सेवा कर सकेंगे। यह फैसला पहले बैच के करीब 24,400 अग्निवीरों की चार साल की सेवा पूरी होने से पहले लिया गया है।

अतिरिक्त कार्यकाल के दौरान पहले साल 43,500 रुपये और दूसरे साल 47,500 रुपये वेतन मिलेगा। इसके साथ ही सेवा निधि में सरकार का योगदान भी मौजूदा 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 70 प्रतिशत कर दिया जाएगा। हालांकि, अतिरिक्त दो साल की सेवा का लाभ सभी पात्र अग्निवीरों को मिलेगा, लेकिन नियमित सैनिक बनने के लिए चयन प्रक्रिया से गुजरना जरूरी होगा।
क्या अब स्थायी नौकरी मिलने का रास्ता आसान होगा?
नई व्यवस्था के तहत Agniveer को छह साल की सेवा के बाद नियमित सैनिक बनने का एक और अवसर मिलेगा। हालांकि, सेना में नियमित कैडर के लिए अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को ही शामिल करने का प्रावधान बरकरार रखा गया है। चयन उनकी इच्छा, प्रदर्शन और सेना के तय मानकों के आधार पर होगा।

यानी दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल स्थायी नौकरी की गारंटी नहीं है। अतिरिक्त सेवा के दौरान मिलने वाले अनुभव और वरिष्ठता का भी ध्यान रखा जाएगा। दो साल बाद चयनित होने वाले अग्निवीरों की वरिष्ठता पहले चरण में चुने गए नियमित सैनिकों से कम होगी।
क्यों किया गया अग्निपथ योजना में बदलाव?
14 जून 2022 को शुरू हुई अग्निपथ योजना का उद्देश्य सेना में युवाओं की भागीदारी बढ़ाना, सैनिकों की औसत उम्र कम करना और वेतन-पेंशन पर होने वाले खर्च को नियंत्रित करना था। लेकिन चार साल की सीमित सेवा और स्थायी नौकरी के कम अवसरों को लेकर युवाओं ने शुरुआत से ही सवाल उठाए थे।

अब सशस्त्र बलों की समीक्षा में Agniveer की फिटनेस, अनुशासन और तकनीकी कौशल को सकारात्मक पाए जाने के बाद यह बदलाव किया गया है। सरकार को उम्मीद है कि अतिरिक्त दो साल की सेवा से जवानों का अनुभव बढ़ेगा और सेना की ऑपरेशनल क्षमता मजबूत होगी। हालांकि, इस फैसले का वास्तविक असर आने वाले वर्षों में देखने को मिलेगा।

