Green Firecrackers को सामान्य पटाखों के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाने वाला विकल्प बताया जाता है, लेकिन इनकी असली प्रभावशीलता पर अब सवाल उठने लगे हैं। ये Green Firecrackers करीब 30% तक महंगे बिकते हैं और दावा किया जाता है कि इनसे 30% कम प्रदूषण होता है। साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद CSIR-NEERI ने कम उत्सर्जन वाले ग्रीन पटाखों की तकनीक विकसित की थी।

जिन्हें अक्टूबर 2019 में बाजार में उतारा गया। हालांकि, अब तक ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो सके कि Green Firecrackers के इस्तेमाल से दिवाली के दौरान शहरों के प्रदूषण स्तर में कितनी कमी आई है। यानी ज्यादा कीमत चुकाने के बावजूद लोगों को इनके वास्तविक फायदे की गारंटी नहीं मिल रही है।
ग्रीन पटाखों में भी मौजूद हैं खतरनाक सूक्ष्म कण
दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी और IIT रुड़की के विशेषज्ञों की 2022 की रिपोर्ट में सामने आया कि Green Firecrackers से निकलने वाले करीब 72% कण अत्यंत सूक्ष्म होते हैं, जबकि पारंपरिक पटाखों में इनका अनुपात 60% से कम पाया गया। ये कण सांस के जरिए फेफड़ों में गहराई तक पहुंच सकते हैं।

दूसरी ओर, भोपाल में ग्रीन पटाखे सामान्य पटाखों से करीब 30% महंगे बिक रहे हैं, लेकिन इनकी रासायनिक गुणवत्ता की स्थानीय स्तर पर नियमित जांच नहीं हो रही। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिकों के मुताबिक, बोर्ड पटाखों की आवाज की जांच करता है, रासायनिक संरचना की नहीं। ऐसे में प्रतिबंधित बेरियम जैसे रसायनों की मौजूदगी की पुष्टि करना भी चुनौती बना हुआ है।
AQI के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता, गुणवत्ता पर उठे सवाल
Green Firecrackers के बाजार में आने के बाद भी दिल्ली, नोएडा और भोपाल जैसे शहरों में प्रदूषण का स्तर लगातार कम नहीं हुआ। CPCB की 2020 की रिपोर्ट में दिवाली के दौरान भोपाल में PM2.5 का स्तर 81.3%, दिल्ली में 82.9% और लखनऊ में 67.6% तक बढ़ा था। वहीं, जिन वर्षों में AQI कम दर्ज हुआ, उनमें कोरोना पाबंदियों, बारिश और हवा की रफ्तार जैसे दूसरे कारण भी जिम्मेदार रहे।

CPCB की निगरानी रिपोर्टों में भी Green Firecrackers के कारण प्रदूषण घटने का स्पष्ट निष्कर्ष नहीं दिया गया है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि जब ग्रीन पटाखे महंगे हैं, उनकी गुणवत्ता की नियमित जांच नहीं होती और प्रदूषण कम करने का ठोस प्रमाण भी नहीं है, तो आखिर इनके सुरक्षित और बेहतर विकल्प होने की गारंटी कौन देगा?


