केंद्र सरकार ने महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में जल्द न्याय सुनिश्चित (Fast Track Court) करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने Fast Track Court (FTSC) योजना को 2030-31 तक बढ़ाने और देश में 71 नई अदालतें खोलने की मंजूरी दे दी है।

इसके साथ ही मौजूदा 779 Fast Track Court की संख्या बढ़कर 850 हो जाएगी। इस योजना पर अगले पांच वर्षों में 3,788.04 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसमें केंद्र सरकार निर्भया फंड से 2,353.15 करोड़ रुपये और राज्य सरकारें 1,434.89 करोड़ रुपये देंगी।
हर कोर्ट में होंगे जज और सरकारी वकील
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, इस योजना का उद्देश्य रेप और POCSO एक्ट से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी लाना है। पहली बार हर Fast Track Court में एक न्यायिक अधिकारी, एक पूर्णकालिक सरकारी वकील और छह सहायक कर्मचारियों की तैनाती का प्रावधान किया गया है।

यह योजना 2 अक्टूबर 2019 को शुरू हुई थी। अब तक देश में 779 Fast Track Court स्थापित हो चुकी हैं, जिनमें 399 विशेष POCSO कोर्ट शामिल हैं। इन अदालतों के जरिए अब तक 4.02 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया जा चुका है।
कोर्ट बढ़ाने के साथ लंबित मामलों पर भी चुनौती
हालांकि, अदालतों की संख्या बढ़ाना ही इस समस्या का पूरा समाधान नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2023 में इन अदालतों में करीब 2.02 लाख मामले लंबित थे, जो 2025 तक बढ़कर 2.45 लाख हो गए।

ऐसे में नई Fast Track Court के साथ जजों की समय पर नियुक्ति, पुलिस जांच में तेजी और मजबूत अभियोजन व्यवस्था भी जरूरी होगी। सरकार का यह फैसला पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाने की दिशा में अहम कदम है, लेकिन इसकी असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नए कोर्ट कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से मामलों का निपटारा कर पाते हैं।

