Delhi Slum Development योजना का दायरा बढ़ने जा रहा है। अब सीलमपुर, सुल्तानपुरी और लाजपत नगर की 17 झुग्गी बस्तियों की जगह तीन हाईराइज रेजिडेंशियल कॉलोनियां बनाने की तैयारी है। इन बस्तियों में कुल 4,870 झुग्गियां हैं। योजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर आगे बढ़ाया जाएगा।

Delhi Slum Development से पहले कठपुतली कॉलोनी, कालकाजी और अशोक विहार में इसी तरह पुनर्विकास का काम किया जा चुका है। अब नए इलाकों के लिए दिल्ली अर्बन शेल्टर इंप्रूवमेंट बोर्ड (डूसिब) निजी एजेंसी नियुक्त करेगा, जो चार महीने के भीतर फिजिबिलिटी स्टडी पूरी करेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि कितनी ऊंची इमारतें बनेंगी और उनमें कितने फ्लैट तैयार किए जाएंगे।
सर्वे में तय होगा फ्लैट, पार्किंग और इमारतों का पूरा प्लान
नियुक्त एजेंसी तीनों इलाकों का सर्वे कर हाईराइज कॉलोनियों का ब्लूप्रिंट तैयार करेगी। इसमें जमीन का कुल क्षेत्रफल, निर्माण की अनुमानित लागत, फ्लोर एरिया रेशियो (FAR), ग्राउंड कवरेज और बिल्ट-अप एरिया की जानकारी शामिल होगी। साथ ही इमारतों में मंजिलों की संख्या, फ्लैटों की क्षमता, पार्किंग और दूसरी जरूरी सुविधाओं का भी आकलन किया जाएगा।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, Delhi Slum Development से सीलमपुर के ब्रह्मपुरी रोड पर 24,900 वर्ग मीटर में 305 झुग्गियां और ईआईजी पुश्ता पर 14,500 वर्ग मीटर में 418 झुग्गियां हैं। वहीं, लाजपत नगर के जल विहार में 9,700 वर्ग मीटर में 526 और सुल्तानपुरी लेबर कॉलोनी में 9,551 वर्ग मीटर में 255 झुग्गियां बसी हैं।
पहले भी हो चुका है झुग्गी बस्तियों का पुनर्विकास
दिल्ली में कठपुतली जेजे क्लस्टर को PPP मॉडल पर हाईराइज रेजिडेंशियल कॉलोनी के रूप में विकसित किया गया था। इसके बाद Delhi Slum Development से कालकाजी के भूमिहीन शिविर और नवजीवन शिविर के साथ अशोक विहार के जेलर वाला बाग क्षेत्र में भी पुनर्विकास किया गया।

अब सीलमपुर, सुल्तानपुरी और लाजपत नगर की योजना Delhi Slum Development मॉडल पर आगे बढ़ाई जा रही है। हालांकि, नई कॉलोनियों का अंतिम नक्शा और निर्माण से जुड़ी जानकारी फिजिबिलिटी स्टडी पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

