Railway के रिजर्व कोच में यात्री का सामान चोरी होने के मामले में दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने Railway को राहत देने के बजाय मुआवजा देने का आदेश बरकरार रखा है। आयोग ने नॉर्दर्न रेलवे की अपील खारिज करते हुए कहा कि आरक्षित कोच में अनधिकृत लोगों के प्रवेश को रोकने में लापरवाही सेवा में कमी मानी जा सकती है।

यात्री अजोय कुमार का करीब 1.20 लाख रुपये का सामान चोरी हुआ था। अब रेलवे को सामान की कीमत पर सितंबर 2017 से 9 फीसदी सालाना ब्याज के साथ मानसिक परेशानी के लिए 25 हजार रुपये भी देने होंगे।
2014 में ट्रेन से चोरी हुआ था ट्रॉली बैग
यह मामला 7 जून 2014 का है, जब अजोय कुमार ट्रेन से दिल्ली से यात्रा कर रहे थे। पुरानी दिल्ली Railway स्टेशन पर दो अनधिकृत लोग रिजर्व कोच में घुस आए और सीट को लेकर बहस करने लगे। इसी दौरान यात्री का ध्यान भटकाकर उनका ट्रॉली बैग लेकर फरार हो गए। बैग में सोने-चांदी के गहने, कपड़े और जरूरी दस्तावेज थे।

यात्री ने टीटीई को शिकायत दी, लेकिन FIR दर्ज होने में देरी हुई। अप्रैल 2024 में जिला उपभोक्ता आयोग ने रेलवे को लापरवाही का दोषी मानते हुए मुआवजे का आदेश दिया था। रेलवे ने इसके खिलाफ अपील की, लेकिन राज्य आयोग ने उसकी दलीलें स्वीकार नहीं कीं।
रेलवे सुरक्षा के रिकॉर्ड नहीं कर सका पेश
राज्य आयोग की अध्यक्ष जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल और सदस्य बिमला कुमारी की पीठ ने 6 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाते हुए Railway की अपील खारिज कर दी। रेलवे ने दलील दी थी कि बिना बुक कराए सामान की चोरी के लिए उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

हालांकि, आयोग के मुताबिक, रेलवे यह साबित करने के लिए टीटीई का ड्यूटी रोस्टर, लॉगबुक और सुरक्षा रिपोर्ट पेश नहीं कर सका कि अनधिकृत लोग आरक्षित कोच में कैसे दाखिल हुए। आयोग ने मुआवजे का आदेश बरकरार रखा। इस फैसले से स्पष्ट होता है कि यात्रियों की सुरक्षा में लापरवाही के मामलों में रेलवे की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए जा सकते हैं।


