उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक Durga Puja पंडाल में मची भगदड़ में 19 लोगों की मौत और 25 लोगों के घायल होने की सूचना है। यह हादसा बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बारिश के दौरान लोगों की भीड़ Durga Puja पंडाल की ओर बढ़ने लगी।

इसी बीच पंडाल गिरने की अफवाह से अफरा-तफरी फैल गई और लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों ने रोशनी और स्वयंसेवकों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की बात भी कही है। हालांकि, हादसे के सही कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
बार-बार भगदड़, फिर भी सुरक्षा में चूक क्यों?
पश्चिम बंगाल में करीब 58 हजार स्थानों पर Durga Puja आयोजित होती है, जहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करना, सुरक्षित रास्ते बनाए रखना और आपात स्थिति से निपटने की तैयारी करना बेहद जरूरी है। हाथरस, महाकुंभ, तिरुपति और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन जैसी जगहों पर हुई भगदड़ की घटनाएं पहले ही चेतावनी दे चुकी हैं कि छोटी-सी चूक भी जानलेवा बन सकती है।

इसके बावजूद यदि बड़े आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ती है, तो जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा केवल आयोजकों की नहीं, बल्कि प्रशासन की भी अहम जिम्मेदारी है।
मुआवजे से आगे बढ़कर दोषियों पर कार्रवाई जरूरी
राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों को 25 लाख रुपये और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने के साथ घायलों को पांच लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है। हालांकि, आर्थिक सहायता अपनों को खोने का दर्द कम नहीं कर सकती। अब जरूरी है कि हादसे की निष्पक्ष जांच हो और यह पता लगाया जाए कि Durga Puja पंडाल में भीड़ नियंत्रण, आपातकालीन इंतजाम और सुरक्षा नियमों के पालन में कहां चूक हुई।

यदि लापरवाही साबित होती है, तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। कोलकाता की यह घटना एक और चेतावनी है—भीड़ प्रबंधन में लापरवाही को सामान्य गलती मानने के बजाय जवाबदेही तय करनी होगी, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।


