मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी INDIA गठबंधन ने शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और चार सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। मुलाकात के बाद Rahul Gandhi ने कहा कि राष्ट्रपति ने ‘वोट चोरी’ के आरोपों से इनकार नहीं किया, बल्कि विपक्ष से सबूत मांगे हैं। उन्होंने घोषणा की कि विपक्ष सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगा।

हालांकि, PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति द्वारा आरोपों को स्वीकार करने का Rahul Gandhi का दावा गलत बताया गया है। विपक्षी प्रतिनिधिमंडल में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और ममता बनर्जी समेत 10 नेता शामिल थे। अन्य सांसदों ने विजय चौक पर धरना दिया। यह पिछले चार दिनों में चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का तीसरा मार्च था।
राष्ट्रपति को सौंपे ज्ञापन में क्या हैं चार मांगें?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के मुताबिक, विपक्ष और Rahul Gandhi ने राष्ट्रपति से ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की। ज्ञापन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर रोक लगाने और पिछले दो वर्षों में हुए चुनावों की समीक्षा की मांग भी शामिल है।

विपक्ष ने दावा किया कि SIR के दौरान 13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम अवैध रूप से हटाए गए हैं और उन्हें बहाल किया जाना चाहिए। गठबंधन ने कई राज्यों के चुनावों में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग की जवाबदेही और मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की। ये सभी आरोप और आंकड़े विपक्ष की ओर से ज्ञापन में पेश किए गए हैं।
ममता बनर्जी बोलीं- राष्ट्रपति ने जांच का भरोसा दिया
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए हैं। उनके मुताबिक, राष्ट्रपति ने मामले का विवरण देखने और सबूत देने को कहा है। Rahul Gandhi ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगाए।

वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि उसके आदेश कानूनी और वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत जारी किए जाते हैं। अब विपक्ष के सोमवार को प्रस्तावित सुप्रीम कोर्ट दौरे पर नजर रहेगी, जहां गठबंधन अपने आरोपों और मांगों को लेकर आगे की कार्रवाई कर सकता है।


