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Pink Card: पिंक टिकट गया, महिलाओं की बढ़ी परेशानी

Pink Card

दिल्ली की DTC और क्लस्टर बसों में महिलाओं के मुफ्त सफर के लिए अब पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड जरूरी हो गया है। शनिवार से पिंक टिकट की सुविधा खत्म होने के बाद जिन महिलाओं के पास Pink Card नहीं है, उन्हें बस में किराया देना पड़ रहा है। अचानक लागू हुए नियम से कई महिला यात्रियों और छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ा।

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कुछ यात्रियों को नए नियम की जानकारी नहीं थी, जबकि कई महिलाओं ने Pink Card बनवाने के लिए सेंटरों पर जाने के बावजूद काउंटर बंद मिलने और दिल्ली का रेजिडेंस प्रूफ नहीं होने जैसी दिक्कतें बताईं। यात्रियों का कहना है कि पहले पिंक टिकट से मुफ्त सफर आसान था, जबकि अब Pink Card की अनिवार्यता से प्रक्रिया जटिल हो गई है।

Pink Card नहीं था तो देना पड़ा किराया, स्कैनिंग में भी दिक्कत

बसों में नए नियम का असर उन महिलाओं पर ज्यादा दिखा जो कभी-कभार दिल्ली आती हैं या दूसरे शहरों से राजधानी पहुंचती हैं। एक छात्रा ने बताया कि दिल्ली का रेजिडेंस प्रूफ नहीं होने के कारण उनका Pink Card नहीं बन सका और सफर के लिए उन्हें अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़े। वहीं, कुछ यात्रियों ने कार्ड स्कैनिंग के दौरान भी परेशानी बताई।

एक महिला ने पहले कम दूरी के लिए कार्ड स्कैन कराया और बाद में गंतव्य बदलने पर दोबारा कार्ड टैप किया, लेकिन मशीन से टिकट नहीं निकला। DTC के मुताबिक, एक ही बस में दोबारा Pink Card टैप करने पर एक घंटे का कूलिंग पीरियड लागू है। हालांकि बस बदलने पर उसी रूट में कार्ड का दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।

38 सेंटरों पर बन रहे पिंक कार्ड

DTC अधिकारियों के अनुसार, महिलाओं के पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड बनाने के लिए दिल्ली में 38 सेंटर बनाए गए हैं। ये सेंटर सोमवार को बंद रहते हैं। अब तक 19.50 लाख से ज्यादा पिंक कार्ड जारी किए जा चुके हैं। सरकार का उद्देश्य मुफ्त बस यात्रा को डिजिटल और व्यवस्थित बनाना है, लेकिन यात्रियों की शिकायतों ने नए सिस्टम की जमीनी तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं। महिलाओं का कहना है कि कार्ड व्यवस्था को आसान बनाने के साथ-साथ पर्याप्त सेंटर, सही जानकारी और स्कैनिंग से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों का भी जल्द समाधान जरूरी है।

Anjali Satya Sharma

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