दिल्ली के सत्य निकेतन PG हादसे के बाद जर्जर इमारतों पर कार्रवाई करने में जुटी MCD की मुहिम फिलहाल थम गई है। हादसे के बाद नगर निगम ने आसपास की 3-4 खतरनाक इमारतों को खाली कराकर उन्हें तोड़ने के नोटिस जारी किए थे, लेकिन कुछ बिल्डिंग मालिकों के कोर्ट पहुंचने के बाद डिमोलिशन पर रोक लग गई। हालांकि, MCD अधिकारियों के मुताबिक, अदालत ने मालिकों पर कुछ शर्तें लगाई हैं। इनका पालन नहीं होने पर इमारतों के खिलाफ दोबारा कार्रवाई की जा सकती है।

5 मंजिला PG गिरने से गई थी 7 लोगों की जान
यह मामला 6 सितंबर को मोती बाग के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक हादसे से जुड़ा है। यहां पांच मंजिला PG हॉस्टल की इमारत ढहने से पांच छात्रों समेत 7 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि पांच अन्य घायल हुए थे। हादसे के बाद सामने आया कि करीब 50-60 साल पुरानी इमारतों पर बिना उचित पिलर के कई मंजिलें बना दी गई थीं। जिस PG में हादसा हुआ, उसका मालिक बेसमेंट को कवर करके अतिरिक्त कमरे बनाने की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान इमारत भरभराकर गिर गई। पास की इमारत भी इसी तरह बनी होने की बात सामने आई थी।

तोड़ने से पहले लोहे के गार्डर से देना पड़ा था सहारा
इमारतों की खतरनाक हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हादसे वाली बिल्डिंग को तोड़ने से पहले उसके ग्राउंड फ्लोर पर मोटे लोहे के गार्डर लगाकर सहारा देना पड़ा था। इसके बाद ही उसे गिराया जा सका। हादसे के बाद MCD ने आसपास की अन्य जर्जर इमारतों को भी एहतियातन खाली कराया और उन्हें तोड़ने के नोटिस दिए। लेकिन बिल्डिंग मालिकों की कानूनी चुनौती के बाद कार्रवाई रुक गई। अब सवाल यह है कि सत्य निकेतन जैसे हादसे के बाद भी खतरनाक इमारतों को सुरक्षित बनाने या हटाने की कार्रवाई कब आगे बढ़ेगी।



