सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत ‘Vande Mataram’ के सभी छह छंद गाने के निर्देश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। नागपुर के बौद्ध एक्टिविस्ट, अंबेडकरवादी स्कॉलर और सिविल राइट्स वकील बीडी बोरकर ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के 28 जनवरी और 9 जुलाई 2026 के आदेशों के खिलाफ याचिका दायर की है। याचिका अभी सुप्रीम कोर्ट के सामने सूचीबद्ध नहीं हुई है।
याचिकाकर्ता का दावा- छह छंदों में धार्मिक संदर्भ
याचिका में दावा किया गया है कि आजादी के बाद से ‘Vande Mataram’ के दो छंदों वाले संस्करण का इस्तेमाल होता रहा है, जबकि ‘आनंदमठ’ में शामिल बाद के छंदों में दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती जैसे धार्मिक संदर्भ आते हैं। बोरकर का आरोप है कि Vande Mataram के छह छंदों को सरकारी कार्यक्रमों में अनिवार्य करना गैर-हिंदू नागरिकों के मौलिक अधिकारों और राष्ट्रीय भाईचारे को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a), 21, 23(1), 25(1) और 29(2) का हवाला देते हुए गृह मंत्रालय के आदेशों को रद्द करने की मांग की है।

1950 के समझौते और दो-छंद वाले संस्करण का भी जिक्र
याचिका में दावा किया गया है कि दो-छंद वाले संस्करण को आजादी के बाद लंबे समय तक अपनाया गया और 1937 में रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह तथा 1950 में संविधान सभा के फैसले के बाद यह व्यवस्था चली। याचिका महात्मा ज्योतिराव फुले के विचारों का भी उल्लेख करती है और कहती है कि सभी धर्मों के लोगों के बीच समान सम्मान और सह-अस्तित्व की भावना बनी रहनी चाहिए। अब सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई के लिए इसे कब सूचीबद्ध करता है, इस पर नजर रहेगी।



