दिल्ली की एक अदालत ने सात साल की बच्ची के यौन शोषण के मामले में आरोपी को POCSO एक्ट के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई। बच्ची ने सुनवाई के दौरान आरोपी को पहचानकर अपने साथ हुई घटना के बारे में बताया था और अदालत से कहा था कि आरोपी ‘अंकल’ को तब तक जेल में रखा जाए, जब तक वह बूढ़ा न हो जाए। उसके इसी बयान को ध्यान में रखते हुए ट्रायल कोर्ट की जज रजनी रंगा ने बच्ची के नाम एक अलग चिट्ठी लिखी।
‘तुम्हारा बचपन वापस नहीं ला सकते, लेकिन तुम्हारी बात सुनी गई’
Delhi POCSO Case में जज ने अपने पत्र में बच्ची को भरोसा दिलाया कि जिस व्यक्ति ने उसे नुकसान पहुंचाया, वह अब आजाद जिंदगी नहीं जी पाएगा। पत्र में बच्ची को उसकी बहादुरी के लिए सराहा गया और कहा गया कि कानून उसका बीता हुआ बचपन वापस नहीं ला सकता, लेकिन उसकी आवाज को न्याय जरूर मिला है। जज ने उसे आगे पढ़ाई करने, दोस्तों के साथ समय बिताने, खेलने और अपने सपनों पर ध्यान देने का संदेश दिया।

हाईकोर्ट ने बरकरार रखी उम्रकैद, ₹10.50 लाख मुआवजा
Delhi POCSO Case मामले में आरोपी को गंभीर यौन शोषण और आपराधिक धमकी का दोषी ठहराया गया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने 22 सितंबर के आदेश में उसकी अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट की सजा बरकरार रखी। हाईकोर्ट ने दिल्ली लीगल सर्विस अथॉरिटी को निर्देश दिया कि जज की चिट्ठी बच्ची तक ₹10.50 लाख के मुआवजे के साथ पहुंचाई जाए।


