CBSE की तीन-भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को अचानक अतिरिक्त पढ़ाई के दबाव में डालने से बचने की बात कही है। कोर्ट ने सुझाव दिया है कि नई व्यवस्था को जनवरी 2027 से अनिवार्य किया जा सकता है, जबकि मौजूदा कक्षा 6 के छात्र चाहें तो इस साल स्वेच्छा से तीसरी भाषा पढ़ सकते हैं। हालांकि, यह अभी कोर्ट का सुझाव है; अंतिम फैसला CBSE के अगले रुख पर निर्भर करेगा।

छात्रों को मिले तैयारी का समय
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि नई व्यवस्था लागू करने से पहले छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों को पर्याप्त समय मिलना चाहिए। सुनवाई के दौरान भाषा शिक्षकों, किताबों और अन्य संसाधनों की उपलब्धता का मुद्दा भी सामने आया। CBSE ने बताया कि वह व्यवस्था की समीक्षा कर रहा है और इसके लिए पांच सदस्यीय समिति भी बनाई गई है।
CBSE ने क्या कहा?
CBSE ने मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को एक साल की छूट देने पर आपत्ति जताई है। बोर्ड का कहना है कि इससे आगे की कक्षाओं में पढ़ाई का क्रम प्रभावित हो सकता है और सीखने में अंतर पैदा हो सकता है। अब CBSE सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर विचार कर 23 सितंबर को अपना रुख सामने रख सकता है। यानी फिलहाल कक्षा 6 के छात्रों के लिए तीसरी भाषा की अनिवार्यता पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

