Supreme Court ने रूस ले जाए गए पांच साल के बच्चे को भारत वापस लाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। Supreme Court ने साफ कहा कि यह कोई सामान्य कस्टडी विवाद नहीं है, बल्कि कोर्ट की कस्टडी से बच्चे को विदेश ले जाने का गंभीर मामला है। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि बच्चे को भारत वापस लाने और सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।

इस मामले में कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल और सभी अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से भी सहयोग मांगा है। अदालत का कहना है कि केवल वीडियो कॉल की व्यवस्था करना इस समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि बच्चे की भारत वापसी सबसे जरूरी है।
साझा कस्टडी के बावजूद मां बच्चे को ले गई रूस
यह मामला एक रूसी महिला और भारतीय मूल के व्यक्ति के पांच साल के बेटे की कस्टडी से जुड़ा है। बच्चे का जन्म 2020 में हुआ था। मां ने बेटे की कस्टडी के लिए अदालत में याचिका दाखिल की थी, जिसके बाद माता-पिता को साझा कस्टडी दी गई थी। हालांकि, आरोप है कि मां ने कोर्ट की अनुमति के बिना बच्चे को रूस पहुंचा दिया।

सुनवाई के दौरान Supreme Court को बताया गया कि भारत और रूस के विदेश मंत्रालयों के बीच राजनयिक बातचीत हुई है। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की बातचीत के आधार पर रूस में मौजूद बच्चे और भारत में रह रहे उसके पिता के बीच वीडियो कॉल कराने का प्रस्ताव भी सामने आया। लेकिन Supreme Court ने इस विकल्प को पर्याप्त नहीं माना और सवाल उठाया कि आखिर अदालत की कस्टडी में रहते हुए बच्चे को देश से बाहर कैसे ले जाया गया।
सरकार से मांगा सहयोग, बच्चे की वापसी पर जोर
Supreme Court ने स्पष्ट किया कि अदालत की अनुमति के बिना बच्चे को विदेश ले जाने के मामले को हल्के में नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने केंद्र सरकार से बच्चे की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने और उसे अदालत के सामने पेश करने में सहयोग मांगा है।

वहीं, एक अन्य मामले में Supreme Court ने लोकसभा और विधानसभा की SC-ST आरक्षित सीटों को हर चुनाव में बदलने की मांग भी खारिज कर दी। अदालत ने इसे संसद के नीतिगत अधिकार क्षेत्र का विषय बताया।

