दिल्ली में Voter List के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से अहम सवाल किए हैं। कोर्ट ने पूछा कि जिन लोगों के नाम पहले से वोटर लिस्ट में थे, लेकिन नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से गायब हैं, उनसे नए वोटरों वाला Form 6 क्यों भरवाया जा रहा है?

कोर्ट ने सुझाव दिया कि ऐसे लोगों को देरी से ही सही, अपना एन्यूमरेशन फॉर्म जमा करने का मौका दिया जाना चाहिए। यह सुनवाई Voter List से बाहर हुए लोगों को नोटिस देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़ी याचिका पर हुई।
Form 6 और Form 8 पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि Form 6 का इस्तेमाल नए वोटर के रजिस्ट्रेशन के लिए होता है, जबकि Form 8 का उपयोग पता बदलने या Voter List में सुधार के लिए किया जाता है। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि वोट देने का अधिकार बेहद महत्वपूर्ण है और किसी व्यक्ति को सिर्फ समय पर जवाब न देने के कारण इससे वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि करीब 43 लाख लोगों के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर हैं। इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो पता बदलने या अस्थायी रूप से बाहर रहने के कारण एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं कर पाए। सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि ऐसे लोगों के लिए अलग श्रेणी बनाई जाए, ताकि वे अपनी स्थिति स्पष्ट कर जरूरी दस्तावेज जमा कर सकें।
30 अक्टूबर है Form 6 जमा करने की आखिरी तारीख
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि SIR प्रक्रिया की जानकारी आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाई जाए और ड्राफ्ट Voter List से बाहर हुए लोगों के नामों का व्यापक प्रचार किया जाए। चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील ने कहा कि किसी योग्य वोटर को स्थायी रूप से बाहर करने का उद्देश्य नहीं है और जरूरत पड़ने पर आवेदन की समयसीमा बढ़ाई जा सकती है।

प्रशांत भूषण ने बताया कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर हुए लोगों के लिए Form 6 जमा करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर है। अदालत ने कहा कि अंतिम वोटर लिस्ट तैयार होने से पहले पहले से पंजीकृत मतदाताओं को एन्यूमरेशन फॉर्म जमा करने का अवसर देने पर विचार किया जाना चाहिए। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होनी है।


