सुप्रीम कोर्ट ने Digital Arrest के नाम पर होने वाली साइबर ठगी को ‘डिजिटल डकैती’ बताते हुए ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत बताई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि वीडियो कॉल के जरिए खासकर बुजुर्गों को डराकर पैसे ऐंठना गंभीर अपराध है और इससे सख्ती से निपटना चाहिए।

अदालत गौरव कुमार साहा और निधि भंडारी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 12 राज्यों में दर्ज 35 साइबर अपराध मामलों को एक जगह करने की मांग की गई थी। आरोप है कि उनकी कंपनी के बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम जमा करने और आगे भेजने के लिए हुआ। याचिकाकर्ताओं ने खुद को धोखाधड़ी का शिकार बताया, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपियों की सुविधा के लिए अलग-अलग राज्यों में चल रही जांच को प्रभावित नहीं किया जा सकता।
डिजिटल अरेस्ट को अलग अपराध बनाने पर विचार, संपत्ति फ्रीज करने का सुझाव
सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी केंद्र सरकार से Digital Arrest को कानून में अलग अपराध के रूप में परिभाषित करने और Digital Arrest के लिए कड़ी सजा पर विचार करने को कहा था। अदालत ने यह भी कहा कि ठोस सबूतों के आधार पर आरोपी की संपत्ति फ्रीज करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।

Digital Arrest ठगी में अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर लोगों को गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं और उनसे पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। त्योहारों के दौरान ऑनलाइन खरीदारी और डिजिटल पेमेंट बढ़ने से फर्जी डिस्काउंट, पार्सल डिलीवरी, बैंक अलर्ट और KYC अपडेट के नाम पर ठगी का खतरा भी बढ़ सकता है।
Cyber Fraud से कैसे बचें? इन बातों का रखें ध्यान
साइबर ठगी से बचने के लिए अनजान SMS, WhatsApp मैसेज और ईमेल में आए लिंक पर क्लिक न करें। किसी अनजान स्रोत से एप डाउनलोड न करें और OTP, बैंक विवरण या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें। अगर कोई व्यक्ति खुद को सरकारी अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी देता है या पैसे जमा करने को कहता है।

तो घबराने के बजाय संबंधित विभाग से उसके आधिकारिक नंबर या वेबसाइट के जरिए पुष्टि करें। याद रखें, ठग डर और जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करें या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज करें।


