मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग (ECI ) ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। ECI आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े सभी आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से जारी किए गए थे और पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में हुई है।

Form 6 में बदलाव के आरोपों पर क्या बोला ECI?
चुनाव आयोग (ECI) ने 248 पन्नों के जवाबी हलफनामे में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और आयोग के फैसलों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने की मांग की है। आयोग के मुताबिक, 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 के आदेश संविधान के अनुच्छेद 324 और संबंधित कानून के तहत लिए गए थे।

Form 6 में बदलाव के आरोपों को खारिज करते हुए आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR के लिए मांगा गया घोषणा-पत्र अलग दस्तावेज था। हालांकि, उसने माना कि ऑनलाइन Form 6 पेज पर इसे दिखाने से ऐसा लग सकता था कि फॉर्म में संशोधन किया गया है। 21 अक्टूबर को समीक्षा के बाद ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को भी दो हिस्सों में बांटने का फैसला लिया गया।
SIR नोटिस पाने वालों को मिलेगी राहत, घर जाकर दस्तावेज लेंगे BLO
ECI आयोग ने बताया कि 26 सितंबर को सर्वसम्मति से फैसला लिया गया था कि SIR के नोटिस पाने वाले लोगों के घर बूथ लेवल अधिकारी (BLO) जाकर दस्तावेज एकत्र करेंगे। इससे लोगों को सुनवाई के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की जरूरत कम होगी। सुनवाई केवल विशेष परिस्थितियों में होगी और जहां संभव हो, ऑनलाइन कराई जाएगी।

आयोग ने यह भी कहा कि ECINet पोर्टल पर मतदाता सूची में कोई नाम जोड़ने, हटाने या बदलने का फैसला संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के आदेश के बिना नहीं हो सकता। आंतरिक मतभेदों से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों पर आयोग ने कहा कि अखबार की खबर अपने आप में कानूनी सबूत नहीं होती। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ 28 अक्टूबर को इन याचिकाओं पर सुनवाई करने वाली है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।


