रिलायंस जियो की पैरेंट कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स का ₹30,213 करोड़ का IPO भारतीय शेयर बाजार में नया रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में है। कंपनी ने इसके लिए ₹1,065 से ₹1,119 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, IPO 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा, जबकि शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को होने की उम्मीद है।

इश्यू के तहत 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे और इसमें ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल नहीं होगा। जुटाई गई रकम का इस्तेमाल रिलायंस जियो इन्फोकॉम के कुछ कर्ज चुकाने और सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए किया जाएगा। सफल होने पर यह IPO वर्ष 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के ₹27,858.75 करोड़ के इश्यू का रिकॉर्ड तोड़ सकता है।
2031 तक डिजिटल अर्थव्यवस्था में बड़ी हिस्सेदारी का लक्ष्य
IPO से पहले जियो प्लेटफॉर्म्स के चेयरमैन आकाश अंबानी ने कहा कि कंपनी की नजर वित्त वर्ष 2031 तक भारत की अनुमानित 1.4 ट्रिलियन डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने पर है। उनके मुताबिक, जियो देश के 60% से अधिक डेटा ट्रैफिक को संभालता है और 530 मिलियन से ज्यादा भारतीयों को सेवाएं देता है।

कंपनी का दावा है कि उसने चीन के बाहर दुनिया के सबसे बड़े 5G नेटवर्क में से एक तैयार किया है। जियो नेटवर्क पर प्रति ग्राहक औसत मासिक डेटा खपत 43.7 GB बताई गई है। मोबाइल कनेक्टिविटी, होम ब्रॉडबैंड, डिवाइस और डिजिटल ऐप्स के जरिए कंपनी अपने कारोबार का विस्तार करना चाहती है।
मुनाफे और कमाई में बढ़ोतरी, निवेशकों की नजर IPO पर
जियो प्लेटफॉर्म्स के वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी का परिचालन राजस्व 14.6% बढ़कर ₹1,46,885 करोड़ और शुद्ध लाभ 15.1% बढ़कर ₹30,049 करोड़ रहा। वहीं, EBITDA 18.8% की बढ़ोतरी के साथ ₹76,255 करोड़ पहुंच गया। मार्च 2026 की तिमाही में कंपनी के 524 मिलियन से अधिक ग्राहक थे और प्रति ग्राहक औसत राजस्व (ARPU) ₹214 रहा।

IPO से पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज की कंपनी में 66.43% हिस्सेदारी थी, जबकि Meta और Google की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 17.7% बताई गई है। अब निवेशकों की नजर IPO के मूल्यांकन, बाजार में इसकी मांग और लिस्टिंग पर रहेगी। हालांकि, निवेश से पहले कंपनी के वित्तीय आंकड़ों, जोखिमों और IPO दस्तावेजों का अध्ययन करना जरूरी है।


