दिवाली से पहले दिल्ली-NCR में पटाखों से होने वाले Festive Pollution पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। सोमवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने सवाल किया, “धर्म का पटाखे फोड़ने से क्या संबंध है?” अदालत ने कहा कि त्योहार मनाते समय धार्मिक भावनाओं के साथ लोगों की सेहत का भी ध्यान रखना जरूरी है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने लोगों को पटाखों के बजाय दीये और फुलझड़ी जैसे विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। अदालत ने साफ किया कि वह धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहती, लेकिन लोगों को Festive Pollution कम करने के लिए खुद भी जिम्मेदारी दिखानी चाहिए।
बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर जताई चिंता
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने पटाखों से होने वाले Festive Pollution के स्वास्थ्य पर असर का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इससे खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर सेहत वाले लोगों को परेशानी हो सकती है। पटाखों को धार्मिक परंपराओं से जोड़ने वाली दलीलों पर उन्होंने कहा कि अगर भगवान को पता चले कि उनके नाम पर बच्चे परेशान हो रहे हैं और बीमार पड़ रहे हैं, तो उन्हें दुख होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने अधिक प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों पर नियंत्रण, पटाखे कम जलाने और तय समय का पालन करने के लिए जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया।
15 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण से जुड़े मामलों पर सुनवाई कर रहा है। इसमें पटाखों के अलावा पराली जलाने और ठोस कचरे के प्रबंधन जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। अदालत ने फसल के अवशेषों की खरीद और उनके दूसरे कामों में इस्तेमाल के लिए बाजार विकसित करने की जरूरत पर भी ध्यान दिलाया।

इस मामले में अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी। अब देखना होगा कि दिवाली के दौरान Festive Pollution कम करने और लोगों की सेहत बचाने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

