भारत सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI Regulation) के इस्तेमाल को सुरक्षित और जिम्मेदार बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार अगले एक महीने में AI Regulation पर परामर्श पत्र जारी करेगी।

इसमें AI सुरक्षा, डीपफेक, साइबर खतरे और AI चैटबॉट के मनोवैज्ञानिक प्रभाव जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि अब भारत में एआई के लिए नियामकीय ढांचा तैयार करने का समय आ गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में तकनीकी समाधान और कानूनी उपायों, दोनों का इस्तेमाल किया जाएगा।
डीपफेक और साइबर खतरों पर रहेगा खास फोकस
विश्व बैंक समूह के सहयोग से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के इंडिया AI Regulation मिशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में वैष्णव ने कहा कि डीपफेक समाज में गंभीर समस्याएं पैदा कर सकते हैं। इसकी गुणवत्ता लगातार बेहतर होने से लोगों के लिए असली और नकली सामग्री में अंतर करना मुश्किल हो सकता है। प्रस्तावित परामर्श पत्र में एआई से होने वाले नुकसान, उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा, कौशल विकास और यह सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जाएगा कि तकनीक के विकास में कोई पीछे न छूटे।

वैष्णव के मुताबिक, एआई को केवल कानून के जरिए नियंत्रित करना पर्याप्त नहीं होगा। उद्योग को सुरक्षा और उपयोगकर्ताओं को होने वाले नुकसान की रोकथाम की प्राथमिक जिम्मेदारी उठानी होगी, जबकि सरकार सभी संबंधित पक्षों के सुझावों के आधार पर आगे की दिशा तय करेगी।
10,000 GPU की मांग, 5,000 GPU के लिए पहली निविदा
AI Regulation के साथ सरकार देश में एआई तकनीक के विकास और इस्तेमाल को बढ़ावा देने की तैयारी भी कर रही है। वैष्णव ने बताया कि सरकारी विभागों में एआई मॉडल और संभावित समाधानों के इस्तेमाल के लिए सूचीबद्धता प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यह निविदा प्रक्रिया से अलग होगी। सूचीबद्ध कंपनियां और स्टार्टअप संबंधित सरकारी विभागों की निविदाओं में हिस्सा ले सकेंगे।

सरकार उद्योग को लंबे समय की मांग का भरोसा देने के लिए पांच साल के आपूर्ति समझौते की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। मंत्री के अनुसार, देश में GPU की अनुमानित मांग 10,000 है और पहली निविदा 5,000 GPU के लिए जारी की जा रही है। इससे भारत में AI Regulation के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और सुरक्षित तकनीकी विकास को गति देने की योजना है।

