डॉक्टरों को गिफ्ट, विदेश यात्रा और हॉस्पिटैलिटी जैसे लाभ देकर प्रभावित करने वाली Pharma Companies की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने Pharma Companies की अनैतिक मार्केटिंग पर रोक लगाने के लिए वैधानिक नियमों की जरूरत पर सुझाव देने वाली समिति गठित करने का निर्देश केंद्र सरकार को दिया है।

कोर्ट ने केंद्र से इस दिशा में उठाए गए कदमों पर अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को भी कहा है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को तय की है।
डॉक्टरों पर कार्रवाई, तो Pharma Companies पर नियम क्यों नहीं?
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख ने मौजूदा व्यवस्था में असमानता का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के Pharma Companies से गिफ्ट और अन्य लाभ लेने पर कार्रवाई का प्रावधान है, लेकिन ऐसे लाभ देने वाली कंपनियों के खिलाफ समान वैधानिक व्यवस्था की कमी है।

इससे दवाओं के प्रिस्क्रिप्शन को प्रभावित करने की आशंका बनी रहती है। समिति संबंधित पक्षों के सुझावों और प्रतिनिधित्व पर विचार कर केंद्र को सिफारिशें देगी। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि फार्मास्युटिकल विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और विधि कार्य विभाग के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हुई है और तीन सदस्यीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है।
UCPMP 2024 को कानूनी मजबूती देने की तैयारी
सुप्रीम कोर्ट पहले भी यूनिफॉर्म कोड फॉर फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज (UCPMP), 2024 को प्रभावी ढंग से लागू करने पर सवाल उठा चुका है। कोर्ट ने यह जानना चाहा था कि पर्याप्त वैधानिक व्यवस्था के बिना इस कोड का पालन कितना प्रभावी हो सकता है।

अब समिति की सिफारिशों और केंद्र सरकार के अगले कदमों पर नजर रहेगी। यदि वैधानिक नियंत्रण लागू होता है, तो Pharma Companies की मार्केटिंग गतिविधियों और डॉक्टरों को दिए जाने वाले प्रलोभनों पर अधिक सख्त निगरानी का रास्ता खुल सकता है।



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