अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव के बावजूद कूटनीति का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। ईरान ने प्रस्ताव दिया है कि अगर अमेरिका उसकी शर्तें मानता है तो 7 दिनों के भीतर Hormuz को फिर से खोला जा सकता है और परमाणु वार्ता दोबारा शुरू हो सकती है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी नए सैन्य टकराव का सामना करने के लिए भी पूरी तरह तैयार है। अमेरिका ने फिलहाल ईरान के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है।
Hormuz खोलने के बदले ईरान ने क्या मांगा?
ईरान की मांगों में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई रोकना, ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी हटाना, तेल बिक्री पर लगी पाबंदियों में राहत और फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को जारी करना शामिल है। अराघची का कहना है कि ये शर्तें मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाई जा चुकी हैं। वहीं अमेरिका का कहना है कि ईरान की मांगें ऐसी हैं जिन्हें मौजूदा रूप में स्वीकार करना मुश्किल है। इसके बावजूद बातचीत की संभावना बनी हुई है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी आने वाले दिनों में ईरान के साथ और बातचीत होने की उम्मीद जताई है।
अंडरवाटर ड्रोन पर आमने-सामने अमेरिका और ईरान
तनाव के बीच ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने Hormuz में एक अमेरिकी मानवरहित अंडरवाटर वाहन पकड़ने का दावा किया है। ईरानी पक्ष ने शुरुआत में इसे REMUS 600 बताया और कहा कि विशेषज्ञ इससे डेटा हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि अमेरिकी सेना ने ईरान के दावे को खारिज करते हुए कहा है कि उसके सभी ऑपरेशनल मानवरहित वाहन उसके नियंत्रण में हैं। होर्मुज का संकट केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद अहम है, इसलिए यहां लंबे समय तक रुकावट दुनिया भर में ऊर्जा कीमतों, परिवहन लागत और महंगाई पर दबाव बढ़ा सकती है। फिलहाल सैन्य तनाव और बातचीत—दोनों साथ चल रहे हैं और आने वाले दिनों में होर्मुज पर होने वाला फैसला इस संकट की दिशा तय करने वाले प्रमुख घटनाक्रमों में से एक होगा।


