गणेश चतुर्थी के बीच दिल्ली में यमुना और अन्य प्राकृतिक जलाशयों में मूर्ति विसर्जन पर रोक है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शहर में निर्धारित कृत्रिम विसर्जन स्थलों की व्यवस्था की गई है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने लोगों से नियमों का पालन करते हुए केवल तय स्थानों पर ही गणपति विसर्जन करने की अपील की है। नियम तोड़ने पर पर्यावरणीय कार्रवाई और जुर्माना लगाया जा सकता है।

78 कृत्रिम तालाबों में होगा विसर्जन
दिल्ली में अलग-अलग इलाकों में 78 कृत्रिम तालाब तैयार किए जाने की जानकारी दी गई है, ताकि श्रद्धालुओं को दूर न जाना पड़े। तीन, पांच या सात दिन के गणपति रखने वाले परिवारों में विसर्जन शुरू हो चुका है, जबकि बड़े स्तर पर विसर्जन आगामी दिनों में होगा। प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश भी दिए हैं।
मिट्टी की मूर्ति और अलग से निर्माल्य संग्रह की अपील
DPCC ने मिट्टी और पर्यावरण-अनुकूल मूर्तियों को बढ़ावा देने की सलाह दी है। पूजा सामग्री और निर्माल्य को जलाशयों में डालने के बजाय निर्धारित संग्रह व्यवस्था में देने को कहा गया है। साथ ही, विसर्जन से पहले और बाद में पानी की गुणवत्ता की जांच भी की जा रही है, ताकि त्योहार के दौरान जल प्रदूषण पर नजर रखी जा सके।

