गणेश उत्सव में आस्था के साथ अब पर्यावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है। दिल्ली में यमुना नदी और अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन पर पूरी तरह रोक है। श्रद्धालुओं की सुविधा और जल प्रदूषण को रोकने के लिए शहर में करीब 90 कृत्रिम तालाब तैयार किए गए हैं।

दिल्ली प्रशासन, जल बोर्ड और बाढ़ नियंत्रण विभाग ने गणेश विसर्जन के लिए शहरभर में 90 कृत्रिम तालाब तैयार किए हैं। इनमें पश्चिमी (20), पूर्वी (16) और उत्तर-पश्चिम (12) दिल्ली प्रमुख हैं। RWA और जनप्रतिनिधियों के समन्वय से बने इन स्थलों पर पुलिस सुरक्षा, सीसीटीवी और एम्बुलेंस तैनात रहेगी। विसर्जन के बाद पानी को ट्रीट करके पार्कों की सिंचाई में इस्तेमाल किया जाएगा।
यमुना में विसर्जन किया तो लग सकता है ₹50 हजार तक जुर्माना
प्रशासन ने प्राकृतिक जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए सख्त नियम बनाए हैं। यमुना में प्रतिमा विसर्जन करते पकड़े जाने पर ₹50,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। श्रद्धालुओं से अपील है कि वे निर्धारित कृत्रिम तालाबों का ही इस्तेमाल करें।
विसर्जन के बाद पानी भी आएगा काम
कृत्रिम तालाबों की व्यवस्था सिर्फ विसर्जन तक सीमित नहीं है। विसर्जन के बाद तालाब के पानी को ट्रीट कर पार्कों की सिंचाई और सड़कों पर छिड़काव जैसे कामों में इस्तेमाल किया जाएगा। यानी आस्था के साथ जल संरक्षण का भी ध्यान रखा जा रहा है।
विसर्जन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था के साथ स्वयंसेवकों की तैनाती की जाती है। पानी के सैंपल भी लिए जाते हैं, ताकि उसकी गुणवत्ता की निगरानी की जा सके। आस्था भी रहे, यमुना भी साफ रहे—इसी सोच के साथ दिल्ली में इस बार गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए कृत्रिम तालाबों का विकल्प तैयार किया गया है।

