दिल्ली में प्रवेश करने वाले लोगों को अब सिर्फ राजधानी की सड़कों का नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति और विरासत का भी अनुभव कराने की तैयारी है। दिल्ली सरकार ने दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख बॉर्डरों पर 13 भव्य एंट्री गेट बनाने की योजना तैयार की है। करीब 300 करोड़ रुपये के बजट वाली इस परियोजना का उद्देश्य दिल्ली के प्रवेश मार्गों को आकर्षक बनाना और पर्यटन को बढ़ावा देना है। दिल्ली पर्यटन और परिवहन विकास निगम (DTTDC) की देखरेख में प्रस्तावित इस योजना में ऐतिहासिक प्रतीकों और आधुनिक वास्तुकला का मेल देखने को मिलेगा।

लोनी, अप्सरा और मयूर विहार से शुरू हुआ काम
योजना के शुरुआती चरण में करीब 30 करोड़ रुपये की लागत से तीन प्रमुख प्रवेश बिंदुओं पर काम शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें लोनी, अप्सरा और मयूर विहार (नोएडा) बॉर्डर शामिल हैं। इन गेट्स को लगभग आठ महीने के भीतर तैयार करने का लक्ष्य बताया गया है। हालांकि, निर्माण की वास्तविक प्रगति और समयसीमा की पुष्टि संबंधित आधिकारिक अपडेट से की जानी होगी। इन तीनों गेट्स की खासियत उनका अलग-अलग डिजाइन और प्रतीकात्मक स्वरूप होगा।
अप्सरा बॉर्डर:12 मीटर ऊंचे गेट पर ‘मेक इन इंडिया’ के शेर का स्कल्पचर और इंटरलॉकिंग गियर्स होंगे। लोनी बॉर्डर:9 मीटर ऊंचे गेट पर नाव जैसी संरचना बनाई जाएगी, जो नदियों की याद दिलाएगी। मयूर विहार-नोएडा बॉर्डर:सड़क के ऊपर M आकार का आधुनिक आर्च बनाया जाएगा, जिस पर ‘Welcome to Delhi’ साइनेज होगा। इन डिजाइनों में दिल्ली की सांस्कृतिक पहचान और आधुनिक वास्तुकला को जोड़ने की कोशिश की गई है।
सिर्फ गेट नहीं, आसपास का भी होगा कायाकल्प
परियोजना में केवल प्रवेश द्वारों का निर्माण ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्र के सौंदर्यीकरण पर भी ध्यान दिया जाएगा। प्रस्तावित कार्यों में सड़क और फुटपाथ में सुधार, आधुनिक लाइटिंग और हरियाली का विकास शामिल है। इससे इन प्रमुख प्रवेश मार्गों का दृश्य स्वरूप बदलने और यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने का लक्ष्य है।
दिल्ली सरकार की 13 एंट्री गेट विकसित करने की योजना राजधानी को सांस्कृतिक और पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान देने की व्यापक पहल का हिस्सा है। बजट घोषणा में इस योजना के लिए 300 करोड़ रुपये का प्रावधान बताया गया था। पहले चरण के तीन गेट्स के लिए DTTDC की ओर से लगभग 30.12 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया है। इसके साथ ही चार अन्य प्रवेश द्वारों—कापसहेड़ा, अरजंनगढ़, औचंदी और ढंसा—के विकास के लिए भी अलग टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है।
