अभिनेता अरशद वारसी ने अपनी जिंदगी और करीब तीन दशक लंबे करियर को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि उन्हें जीवन में अपनी उम्मीद से कहीं ज्यादा मिला है और अब उनके लिए सफलता का मतलब लगातार कुछ पाने की चाह नहीं, बल्कि संतुष्ट रहना है। अरशद के मुताबिक, इंसान को अपनी इच्छाएं पूरी होने के बाद कहीं न कहीं रुकना भी सीखना चाहिए, क्योंकि यह बढ़ती लालसा, परेशानी का कारण बन सकती है।

‘जो सोचा था, वो सब मिल गया’
अरशद ने बताया कि उन्होंने कभी अपना घर, और गोवा में झील के पास एक घर होने की इच्छा की थी, जो पूरी हो गई। उन्होंने अपने सफर को याद करते हुए कहा कि भगवान ने उन्हें उनकी उम्मीद से कहीं ज्यादा दिया है। अभिनेता ने यह भी बताया कि उन्होंने अपने करियर में काम मांगने के लिए किसी को फोन नहीं किया और न ही हर प्रोजेक्ट के लिए ऑडिशन देने की कोशिश की।
रिजेक्टेड रोल से बना ‘सर्किट’
अरशद ने अपने करियर के उस पहलू का भी जिक्र किया, जब कई बार उन्हें ऐसे किरदार मिले जिन्हें दूसरे कलाकारों ने छोड़ दिया था। ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ का सर्किट ऐसा ही किरदार था, जिसने उनकी पहचान को नई दिशा दी। हाल ही में उनकी फिल्म ‘जीवन भीमा योजना’ 4 सितंबर 2026 को रिलीज हुई, जिसमें वह पहली बार डबल रोल में नजर आए।

