मेडिकल साइंस जिसे हिंदी में चिकित्सा विज्ञान भी कहते है और अगर चमत्कारी विज्ञान भी कहा जाए तो भी इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। आज का दौर उभरती हुई टेक्नोलॉजी का दौर है जिसमें से एक है मेडिकल टेक्नोलॉजी।
सरकारी अस्पताल में हुआ चमत्कार
इसी मेडिकल टेक्नोलॉजी ने राजधानी के एक सरकारी अस्पताल में एक ऐसा चमत्कार कर दिखाया है, जो कि अविश्वसनीय है। दरअसल, दिल्ली के LNJP अस्पताल में डॉक्टरों ने बात करते-करते एक मरीज की ब्रेन सर्जरी कर डाली।
डॉक्टर ने क्या कहा ?
LNJP अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग के HOD डॉक्टर चंद्र शेखर ने कहा कि आम तरह की ब्रेन सर्जरी में मरीज को बेहोश कर दिया जाता है, फिर सर्जरी कर दी जाती है। जब मरीज होश में आता है, तब धीरे-धीरे पता चलता है कि सर्जरी ठीक हुई या नहीं। इस बारे में हमने मरीज को बताया और मरीज भी पढ़ा लिखा निकला, उसे पता था कि अवेक सर्जरी क्या होती है।
डॉक्टर ने बताया कि हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि मरीज को बेहोश कितना किया जाए, यह एनेस्थीसिया के एक्सपर्ट टीम को करना था, क्योंकि इस सर्जरी में पहले मरीज को इतनी देरी के लिए बेहोश किया जाता है जब तक सर्जन मरीज का स्कल यानि कि खोपड़ी खोलकर उसके अंदर तक ना पहुंच जाए। जब सर्जरी शुरू की जाती है तो ब्रेन के किसी महत्वपूर्ण हिस्से को स्पर्श करते हैं, उसका असर उसके अंग पर हो रहा है, यह पता लगाने के लिए हम सर्जरी के दौरान ही मरीज से बात करते रहते हैं।
उन्होंने कहा कि जैसे ऑप्टिक नर्व का हिस्सा है, जब हम उस हिस्से की तरफ जा रहे थे तो मरीज से कहा कि आंख खोलो। उसने आंख खोली और जैसे ही उस हिस्से को स्पर्श किया, उसका असर स्क्रीन पर भी दिखा। इस प्रकार की सर्जरी में हमारी कोशिश होती है कि ब्रेन के उस खास हिस्से को बचाना, जिससे शरीर के महत्वपूर्ण काम होते हैं और यह हम सर्जरी के दौरान ही कर पाते हैं। हमें खुशी है कि 5 घंटे में हमने अपनी टीम के साथ सफलतापूर्वक इस सर्जरी को पूरा किया।


