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अश्लीलता आरोप ग़लत, बरी-कोर्ट

समाज में संस्कृति, संस्कार और सभ्यता में लगातार परिवर्तन देखने को मिल रहा है और इस परिवर्तन की शुरुआत 1947 के बाद होनी शुरू हुई, जब हमारा भारत देश अंग्रेजों से तो आजाद हो गया लेकिन अंग्रेजियत से आज तक आजाद नहीं हो पाया। यही वजह है कि देश के हर राज्य, शहर और जिलों में अश्लीलता का एक ऐसा रूप भी देखने को मिलता है जो कि अंग्रेजों की ही देन है।

अश्लीलता का आरोप, कोर्ट ने किया बरी

दरअसल, पिछले साल एक दिल्ली के एक बार में 7 महिलाओं पर अश्लील डांस करने और जनता को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे थे। हालांकि, तीस हजारी कोर्ट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए सातों महिलाओं को बारी कर दिया। कोर्ट ने कहा, ना तो छोटे कपड़े पहनना कोई अपराध है और ना ही गानों पर नाचना किसी अपराध की श्रेणी में आता है।

ये आरोप एक सब-इंस्पेक्टर द्वारा लगाया गया था, जिसके बाद पहाड़गंज थाने की पुलिस ने इन महिलाओं के खिलाफ IPC की धारा 294 के तहत मामला दर्ज किया था।सब-इंस्पेक्टर के मुताबिक, वह उस समय इलाके में गश्त पर थे। आरोप था कि जब वह बार में घुसे तो देखा कि कुछ लड़कियां छोटे कपड़े पहने हुए अश्लील गीतों पर डांस कर रही थी।

कोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारी ने कहीं भी ये दावा नहीं किया कि इन महिलाओं के डांस से किसी को कोई नुकसान पहुंचा। दो अभियोजन पक्ष के गवाहों ने भी कहा कि वे मजे के लिए बार में गए थे और इसके बारे में उन्हें कुछ नहीं मालूम। अदालत के मुताबिक पुलिस द्वारा एक सोची समझी कहानी गढ़ी गई, जिसका उन्हें समर्थन नहीं मिला। अदालत ने कहा कि भले ही हम एसआई धर्मेंद्र के दावे को मंजूर कर ले, लेकिन फिर भी इससे ये अपराध साबित नहीं होगा।

अदालत ने बार मैनेजर को भी बरी कर दिया। उन पर सीसीटीवी को ठीक से ना ऑपरेट करने का आरोप था। अदालत ने इस पर भी गौर किया कि ऐसा कोई आरोप नहीं था जिससे संबंधित रेस्टोरेंट और बार उचित लाइसेंस के बिना या सरकारी दिशानिर्देशों या प्रावधानों का उल्लंघन में चल रहे थे।

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