प्रयागराज महाकुंभ के पावन अवसर पर संगम की रेती पर एक माह तक जप, तप और साधना में लीन रहे 10 लाख से अधिक कल्पवासी बुधवार को अपने आध्यात्मिक अनुभवों को आत्मसात कर घर लौटेंगे। पूर्णिमा के बाद त्रिजटा स्नान के साथ ही कल्पवासियों का यह धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होगा और वे पुनः अपने गृहस्थ जीवन की दिनचर्या शुरू करेंगे।
संगम तट पर पूरे महीने श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में स्नान, दान, जप और भजन-कीर्तन में तल्लीन रहे। साधु-संतों के प्रवचनों और आध्यात्मिक चर्चाओं ने श्रद्धालुओं के मन को शांति और ऊर्जा प्रदान की। कल्पवास के दौरान संयम, तपस्या और धार्मिक आचरण को अपनाने वाले भक्त अपने भीतर एक नई ऊर्जा का संचार अनुभव करते हैं।
पूर्णिमा के पावन अवसर पर कल्पवासी त्रिजटा स्नान के बाद अपने-अपने घरों को प्रस्थान करेंगे। मान्यता है कि इस स्नान से कल्पवास का संपूर्ण फल प्राप्त होता है और व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
कल्पवासियों की वापसी को सुगम बनाने के लिए भारतीय रेलवे ने प्रयागराज से विभिन्न शहरों के लिए विशेष ट्रेन सेवाओं की घोषणा की है। गाड़ी सं. 03697/98 धनबाद-टूंडला-धनबाद कुंभ स्पेशल ट्रेन 15 फरवरी को धनबाद से और 16 फरवरी को टूंडला से एक-एक फेरा लगाएगी। इसके अलावा, अन्य मार्गों पर भी अतिरिक्त ट्रेनों की व्यवस्था की गई है ताकि श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के अपने गंतव्य तक पहुंच सकें।
कल्पवास समाप्त होने के साथ ही श्रद्धालुओं ने अगले महाकुंभ या अर्धकुंभ की तैयारियों की मनोकामना भी की है। प्रयागराज की इस आध्यात्मिक नगरी में एक बार फिर स्नान, दान और तपस्या का पुण्य अवसर प्राप्त करने की कामना लेकर कल्पवासी अपने घरों को विदा हो रहे हैं।

