विश्व को चकाचौंध करे जैसे रेगिस्तानी शहर दुनिया को आकर्षित कर रहे हैं, दुबई हो या अबूधाबी जैसे तमाम शहर अपने विकास के लिए दुनिया के लिए आकर्षण केन्द्र बने हुए हैं। क्या अपनी दिल्ली भी कभी विश्व को चकाचौंध कर सकेगी?
इन्द्रप्रस्थ का पुनरुद्धार संभव हो सकता है? असंभवता केवल नाकारा लोगों का गहना है, कर्मयोगियों के लिए नहीं। बस दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ थोड़ी सी ज़िद भी ज़रूरी होती है। यमुना मैया को स्वच्छ किया जा सकता है, दिल्ली को प्रदूषण और गंदगी मुक्त कर एक आदर्श शहर बनाया जा सकता है। हर नल में स्वच्छ जल, सड़कों से अतिक्रमण हटाना, कूड़े के पहाड़ों को समाप्त करना, अवैध घुसपैठियों को निष्कासित करना—यह सब संभव है। बस जरूरत है एक ईमानदार शुरुआत की।
यदि अभी इस दिशा में कदम नहीं बढ़ाए गए तो फिर कभी ऐसा अवसर नहीं मिलेगा। दिल्लीवासियों ने बड़ी उम्मीदों के साथ प्रधानमंत्री मोदी पर भरोसा जताया है। उन्होंने राम मंदिर का निर्माण, अनुच्छेद 370 का हटना और उत्तर प्रदेश को अपराध मुक्त होते देखा है। अब दिल्ली के उद्धार की ज़िम्मेदारी चुने गए विधायकों के कंधों पर है। वे अपने दायित्व को कितनी गंभीरता से निभाएंगे, इसी पर दिल्ली और उसके नागरिकों का भविष्य टिका होगा।
यदि दिल्ली के विधायकों में इच्छाशक्ति और योग्यता की कमी नजर आती है, तो क्या माननीय योगी आदित्यनाथ को दिल्ली का दायित्व सौंपा जा सकता है? कई बार गवर्नर दो राज्यों की जिम्मेदारी निभाते हैं, तो यह भी एक विकल्प हो सकता है। आवश्यकता केवल इच्छाशक्ति की है। यह अंतिम अवसर भी हो सकता है—यदि इस बार नहीं कर सके तो…!

